रामगढ़ (झारखंड) : जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन ने रामगढ़ जिले के वेस्ट बोकारो क्षेत्र में किसानों के लिए एक नई राह खोली है। संस्था की पहल से अब सूखा प्रभावित गांवों में भी सतत और जलवायु अनुकूल खेती संभव हो रही है।

जल संरक्षण के साथ शुरू हुआ बदलाव
पिछले एक वर्ष में टाटा स्टील फाउंडेशन ने जल संकट झेल रहे इस क्षेत्र में 13 तालाबों और कई चेक डैम का निर्माण कराया है। इसका उद्देश्य भूजल स्तर में सुधार और खेती के लिए स्थायी जल स्रोत तैयार करना है। इन प्रयासों के माध्यम से संस्था 3.8 मिलियन क्यूबिक फीट तक भूजल भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
तालाब व चेक डैम निर्माण के क्षेत्र
- नवाडीह : 6 तालाब
- अतना, बंजी, जोबला, मांडू, सोनडीहा : 1-1 तालाब
- कुजू नॉर्थ : 2 तालाब
- बसंतपुर (बेरवा गांव) : 1 चेक डैम
- बदली रूपम देवी की किस्मत
बड़गांव पंचायत की किसान रूपम देवी की कहानी इस बदलाव की जीती-जागती मिसाल है। पहले पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहने वाली रूपम अब सोलर पंप से सिंचाई कर उच्च मूल्य की फसलें उगा रही हैं। वे अब धान के अलावा फूल गोभी, प्याज, खीरा और तरबूज की खेती कर रही हैं। इससे उनकी वार्षिक आय 50 हजार से बढ़कर 70 हजार रुपये हो गई है। उनकी सफलता आसपास की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह
टाटा स्टील फाउंडेशन ने अब तक 10 महिला किसानों के लिए सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई पंप उपलब्ध कराए हैं। इससे ये महिलाएं अब सालभर फसलों की खेती कर पा रही हैं, वह भी बिना बारिश के भरोसे। संगठन की मानें तो यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम है।
भूजल रिचार्ज की पहल से मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
जलवायु अनुकूल खेती के साथ-साथ भूजल रिचार्ज की दिशा में भी काम हो रहा है। इस प्रयास का उद्देश्य है कि खेती के लिए जल स्रोत सतत बने रहें और वर्षाजल को संरक्षित कर भविष्य के लिए जल संकट को टाला जा सके।

