Jamshedpur : कोल्हान विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेज गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। इन कॉलेजों को अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लगभग दो वर्षों से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कंटिजेंसी (आकस्मिक व्यय) की राशि का आवंटन नहीं किए जाने के कारण कॉलेजों में साफ-सफाई और पठन-पाठन सामग्री जैसे चॉक-डस्टर तक की कमी होने लगी है।
परीक्षा संचालन में भी परेशानी
वित्तीय अभाव के चलते कॉलेजों को परीक्षा संबंधी कार्यों में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उत्तरपुस्तिकाओं को चाईबासा स्थित विश्वविद्यालय से लाने और मूल्यांकन के बाद वापस पहुंचाने के खर्च के लिए भी कॉलेजों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। लंबे समय के बाद विश्वविद्यालय को स्थायी कुलपति तो मिल गई हैं, लेकिन कॉलेजों की इस आर्थिक दुर्दशा का अभी तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।
सिंडिकेट की बैठक में उठेगा ज्वलंत मुद्दा
हालांकि, विश्वविद्यालय के सिंडिकेट प्रतिनिधियों ने अब इस समस्या को गंभीरता से उठाने की तैयारी कर ली है। विश्वविद्यालय की अगली सिंडिकेट मीटिंग जल्द होने वाली है। एक सिंडिकेट सदस्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बैठक में कंटिजेंसी फंड की समस्या को प्रमुखता से उठाया जाएगा। सदस्यों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन कॉलेजों को इस आवश्यक राशि का आवंटन नहीं करता है, तो कॉलेजों के सामान्य कामकाज के साथ-साथ परीक्षाओं का सुचारू संचालन भी असंभव हो जाएगा।
नई कुलपति से उम्मीदें
इस बार कॉलेजों को इस वित्तीय संकट से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि यह कोल्हान विश्वविद्यालय की नई कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में होने वाली पहली सिंडिकेट मीटिंग है। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में कॉलेजों के सुचारू संचालन, पठन-पाठन की व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण एजेंडों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया करते हुए उन पर मुहर भी लगाई जा सकती है।

