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JHARKHAND HEALTH NEWS : ईस्टर्न हेमेटोलॉजी ग्रुप कांफ्रेंस में बोले एक्सपर्ट्स, झारखंड में 60 परसेंट लोग एनीमिया की चपेट में

by Vivek Sharma
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रांची: होटल रेडिशन ब्लू सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन पर एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। 9वीं ईस्टर्न हेमेटोलॉजी ग्रुप कांफ्रेंस के तहत आयोजित इस कांफ्रेंस में देशभर से एक्सपर्ट का जुटान हुआ है।  जिसमें सेक्रेटरी डॉ आर के जेना ने कहा कि झारखंड में स्थिति ठीक नहीं है। 60 परसेंट आबादी एनीमिया की चपेट में है। लोगों को तत्काल इसकी जानकारी नहीं मिलती। जब स्थिति बिगड़ जाती है तो लोग डॉक्टर के पास पहुंचते है। उन्होंने झारखंड में बोन मैरो ट्रांसप्लांट जल्द से जल्द शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थिति भयावह है इसके बावजूद सरकार का ध्यान इस ओर नहीं गया।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट से इलाज संभव

15-20 परसेंट लोग सिकल सेल एनीमिया और खून की बीमारी की चपेट में है। ऐसे में तत्काल राज्य में हेमेटोलॉजी डिपार्टमेंट को एक्टिव करने की जरूरत है। जिससे कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो सके। उन्होंने थैलेसीमिया को लेकर कहा कि 90 परसेंट तक सक्सेस रेट है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट से ही इसे ठीक किया जा सकता है। यहां पर डॉक्टर नहीं है और न ही विभाग है। सरकार इस पर काफी लेट है। तत्काल सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। आज ब्लड कैंसर के मरीजों को भी बाहर जाना पड़ता है। इसमें काफी खर्च आता है। जबकि हमारे ओडिशा में सरकारी हॉस्पिटल में ये सुविधाएं काफी सस्ते दर पर उपलब्ध है। जबकि प्राइवेट में इसके लिए लाखों रुपये लिए जाते है।   

अप्लास्टिक एनीमिया के बढ़ रहे मामले

इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि रक्त विकारों, विशेषकर सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के नियंत्रण में अर्ली डायग्नोसिस अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य में ब्लड कैंसर और अप्लास्टिक एनीमिया के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, जिनका इलाज सदर अस्पताल, रांची में किया जा रहा है। उन्होंने सरकार की योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत इन बीमारियों के इलाज को और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सस्ते जांच से भ्रम की आशंका

एम्स दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ एच पति ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया के लिए सही और विशेष प्रकार की जांच आवश्यक है। सस्ती और कम गुणवत्ता वाली जांच से भ्रम पैदा हो सकता है, जिससे मरीज को पूरी जिंदगी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे सर्वोत्तम तकनीकों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। वहीं हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि रांची सदर अस्पताल में 1500 से अधिक थैलेसीमिया मेजर के मरीज पंजीकृत हैं। उन्होंने जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी की रोकथाम को संभव बताया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की एंटीनेटल स्क्रीनिंग से बीमारी की प्रारंभिक पहचान कर बचाव किया जा सकता है।

देशभर में कम है हेमेटोलॉजिस्ट

डॉ टीके डोलाई ने रक्त विकारों को देश की गंभीर स्वास्थ्य समस्या बताते हुए कहा कि सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए समय पर निदान और प्रशिक्षित डॉक्टरों की आवश्यकता है। उन्होंने देश में हेमेटोलॉजिस्ट की कमी पर भी चिंता जताई। सम्मेलन में सीएमसी वेल्लौर के डॉ बीजू जॉर्ज, एसजीपीजीआई के डॉ. संजीव यादव, डॉ हीरा प्रसाद पति, टीएमएच के डॉ आशीष रथ, एससीबीएमसीएच कटक के डॉ आर के जेना और आईएचटीएम की डॉ. मैत्रेयी भट्टाचार्य सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी रक्त विकारों की रोकथाम, उपचार और जागरूकता पर अपने विचार साझा किए।

निकाली गई जागरूकता रैली

मोरहाबादी मैदान में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से रैली का आयोजन किया गया। जिसमें चिकित्सकों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और एएनएम स्कूल की छात्राओं ने भाग लिया। रैली के माध्यम से आमजन को बीमारी की पहचान, कारण और बचाव के बारे में जानकारी दी गई।

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