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झारखंड के नगर निगमों को दो वर्ग में बांटे जाने को हाई कोर्ट में चुनौती, 13 जनवरी को होगी सुनवाई

सरकार केवल कार्यपालक आदेश के जरिए ऐसा वर्गीकरण नहीं कर सकती। इसलिए यह निर्णय संविधान के विरुद्ध है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

by Reeta Rai Sagar
Jharkhand High Court
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Jamshedpur : राज्य के नगर निगमों को झारखंड सरकार ने दो वर्गों में बांट दिया है। इस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में अब 13 जनवरी को सुनवाई होगी। बुधवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन समय अभाव के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने अगली तिथि 13 जनवरी तय कर दी।

इस मामले में शांतनु कुमार चंद्रा ने याचिका दाखिल कर राज्य सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है। याचिका में कहा गया है कि संविधान में नगर निगमों के इस तरह के वर्गीकरण का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार केवल कार्यपालक आदेश के जरिए ऐसा वर्गीकरण नहीं कर सकती। इसलिए यह निर्णय संविधान के विरुद्ध है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

अदालत को बताया गया कि नगर निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने नौ नगर निगमों को दो वर्ग—वर्ग-क और वर्ग-ख—में बांट दिया है। वर्ग-क में रांची और धनबाद को शामिल किया गया है, जबकि शेष नगर निगमों को वर्ग-ख में रखा गया है।

याचिकाकर्ता ने मेयर पद के आरक्षण को लेकर भी आपत्ति जताई है। अदालत को बताया गया कि नगर निकाय चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कराए जा रहे हैं। इसके अनुसार धनबाद में अनुसूचित जाति की आबादी करीब दो लाख है, इसके बावजूद वहां मेयर का पद अनारक्षित कर दिया गया। वहीं गिरिडीह में अनुसूचित जाति की आबादी मात्र 30 हजार होने के बावजूद वहां मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।

याचिका में सरकार की इस आरक्षण नीति को भी संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।

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