Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के कुख्यात अमन श्रीवास्तव गैंग को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने के आदेश को रद कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) रांची ने दर्ज कांड संख्या 1/2022 में आरोपियों पर केवल आईपीसी व बीएनएस की धाराओं के तहत ही मुकदमा चलेगा।
यह अहम निर्णय विनोद पांडे की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के बाद आया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और संजीव मेहता की पीठ ने साफ कहा कि बिना किसी नए या ठोस सबूत के यूएपीए जैसी कठोर कानून की धाराएं लागू नहीं की जा सकतीं।
दरअसल, एटीएस रांची ने अमन श्रीवास्तव गैंग पर रंगदारी वसूली और दहशत फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया था। इस केस में विनोद पांडे को गैंग का सदस्य बताया गया था। छापेमारी के दौरान विनोद पांडे के पास से 5.42 लाख रुपये और सिद्धार्थ साहू के पास से 28.55 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। इसी आधार पर अमन श्रीवास्तव समेत 19 लोगों के खिलाफ यूएपीए के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले में राज्य सरकार ने उपायुक्त के अनुरोध पर तीसरी बार यूएपीए की धाराओं 16, 17, 18, 20 और 21 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इससे पहले दो बार सरकार ने ठोस साक्ष्य के अभाव में अनुमति देने से इनकार कर दिया था। विनोद पांडे ने इस तीसरी अनुमति को पहले झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन याचिका खारिज हो गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तीसरी बार भेजे गए प्रस्ताव में कोई नया सबूत या अतिरिक्त सामग्री नहीं थी। राज्य सरकार के वकील ने भी इस बात को स्वीकार किया। कोर्ट ने इसे कानून के खिलाफ मानते हुए यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि अब यह मामला केवल आईपीसी या बीएनएस के तहत ही आगे बढ़ेगा।
इस फैसले को झारखंड में कानून व्यवस्था और यूएपीए के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

