Pakur : पाकुड़ जिले में रेल सहुलियत के विस्तार और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। पत्थर लोडिंग के बाद अब कोयले की ढुलाई भी पूरी तरह बंद कर दी गई है। इससे रेलवे और सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।शनिवार को पाकुड़ के लोटामारा रेलवे साइडिंग से कोयले की लोडिंग और रेल मार्ग से आपूर्ति रोक दी गई है।
यह कदम पाकुड़ और साहिबगंज में एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव, बेहतर यात्री सुविधाओं और पटना व दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग को लेकर उठाया गया है।झामुमो विधायकों के आह्वान पर पचुवाड़ा सेंट्रल कोल ब्लॉक और नॉर्थ कोल ब्लॉक से निकाले जाने वाले कोयले की सप्लाई प्रभावित हुई है। यहां से कोयला पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को भेजा जाता है।
ढुलाई बंद रहने के कारण पहले ही दिन रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।हावड़ा रेलवे डिवीजन के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर शिवराम मांझी ने बताया कि रेल प्रशासन को यात्रियों की मांगों की जानकारी है और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव व सुविधाओं में सुधार को लेकर गंभीरता से पहल की जाएगी।इधर, मालपहाड़ी रेलवे साइडिंग से पिछले सात दिनों से पत्थर व्यवसायियों ने भी लोडिंग बंद कर रखी है। इससे पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पत्थर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
जेएमएम विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि रेलवे को इस क्षेत्र से माल ढुलाई के जरिए करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन यात्रियों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए चेतावनी दी कि अगर कोयला ढुलाई लंबे समय तक बाधित रही, तो बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा और केंद्र व राज्य सरकार को राजस्व नुकसान झेलना पड़ेगा।रेलवे सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों पर भी प्रभाव डालने लगा है।

