जमशेदपुर : झारखंड में जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के नाम पर ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट के जरिए मरीजों से पैसे वसूले जाने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन 96 डॉक्टरों और 7 विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम से ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट बुकिंग दिखाई जा रही है, उन्हें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी तक नहीं है। न तो अस्पताल प्रबंधन ने किसी निजी एजेंसी को ऐसी सुविधा चलाने की अनुमति दी है और ना ही डॉक्टरों ने अपने नाम से ऑनलाइन बुकिंग की सहमति दी है।

वेबसाइट पर एमजीएम की पूरी प्रोफाइल, मरीजों से वसूली
जानकारी के अनुसार, HexaHealth नामक प्लेटफॉर्म से जुड़ी एक वेबसाइट पर महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल की पूरी प्रोफाइल अपलोड है। इसमें अस्पताल की सुविधाएं, ओपीडी समय, बीमा योजनाओं की जानकारी और डॉक्टरों की लंबी सूची मौजूद है। इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से मरीजों से 100 रुपये से 150 रुपये लेकर ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट बुक किए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि सरकारी अस्पताल के नाम और डॉक्टरों की पहचान का इस तरह उपयोग किस अधिकार से किया गया?

तबादला-शुदा और दिवंगत डॉक्टरों के नाम भी शामिल
मामले को और संदिग्ध बनाता है वेबसाइट पर दर्ज डॉक्टरों का विवरण। सूची में ऐसे कई चिकित्सकों के नाम पाए गए हैं, जिनका वर्षों पहले तबादला हो चुका है। इतना ही नहीं, कुछ दिवंगत डॉक्टरों के नाम भी अब तक सूची में बने हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि या तो जानकारी जान-बूझकर अपडेट नहीं की गई या बिना किसी सत्यापन के वेबसाइट तैयार कर दी गई। वेबसाइट पर यह भी दावा किया गया है कि मरीज सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक परामर्श ले सकते हैं और सभी बीमा योजनाएं मान्य हैं। इसके साथ ही ‘वाट्सएप एक्सपर्ट’ से संपर्क का विकल्प भी दिया गया है। आम मरीज इसे अस्पताल की आधिकारिक व्यवस्था मानकर अप्वाइंटमेंट बुक करा रहे हैं, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर जब डॉक्टर ही इससे इनकार कर दें, तो परेशानी और नाराजगी का जिम्मेदार कौन होगा?
पैसा कहां जा रहा? साइबर ठगी या बड़ा रैकेट
सबसे अहम सवाल यह है कि ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट के नाम पर मरीजों से ली जा रही राशि आखिर किसके खाते में जा रही है। क्या यह सीधा साइबर ठगी का मामला है या किसी बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा? डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल नाम के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के भरोसे और सरकारी अस्पताल की साख के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

शिकायत और जांच की तैयारी
मामला सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में पूरे दिन इसे लेकर चर्चा होती रही। चिकित्सकों ने निर्णय लिया है कि छुट्टी पर चल रहे अधीक्षक के लौटते ही पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत दी जाएगी। इसके साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि जांच केवल आंतरिक स्तर पर न होकर साइबर सेल या सक्षम एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इसकी जानकारी मिली है। मामला गंभीर है। जांच कराई जाएगी, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डाॅ. संजय कुमार, प्रिंसिपल, एमजीएम

