Kanke Police Station : रांची : रांची के कांके थानेदार प्रकाश रजक लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। इनके खिलाफ एक और विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। कांके थाना में दर्ज एक मामले में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद एसएसपी राकेश रंजन ने यह आदेश जारी किया है। थानेदार के अलावा केस के फॉर्मर इंवेस्टिगेशन आॅफिसर (आईओ) संतोष कुमार पर भी गाज गिरी है। दरअसल, कांके थाना में दर्ज एक मामले की अनुसंधान प्रक्रिया में झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए थे।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई। हाईकोर्ट की फटकार के बाद रांची एसएसपी ने कांके थानेदार प्रकाश रजक और अनुसंधानकर्ता के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का आदेश जारी किया है। इस केस में आईओ ने 11 महीनों में कोई कार्रवाई नहीं की और जांच पूरी तरह ठप रखा, जबकि बतौर पर्यवेक्षण अधिकारी कांके थानेदार ने भी लापरवाही बरती। महीनों बीत जाने के बाद भी न किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई, न ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद विभागीय स्तर पर कांड की समीक्षा की गई, जिसमें कई गंभीर त्रुटियां सामने आईं।
आरोपियों के खिलाफ वारंट लेने के लिए पुलिस ने आवेदन तक नहीं दिया
कांके थाना में यह मामला 13 जुलाई 2024 को दर्ज हुआ था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धाराएं 190/126(2)/115(2)/109/117/352/74/61(2) के तहत 15 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले में इतनी लापरवाही बरती गई कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ वारंट लेने के लिए कोर्ट में आवेदन तक नहीं दिया। आदेश के कहा गया है कि किसी भी थाने में लंबित मामलों की निगरानी और नियमित समीक्षा थाना प्रभारी की जिम्मेदारी होती है। जांच में उत्पन्न तकनीकी या अन्य समस्याओं का समाधान करना और समय से निष्पादन करना पर्यवेक्षण अधिकारी की जिम्मेदारी है। इस स्थिति में कांके थाना प्रभारी की भी बरती गई घोर लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बेल रिजेक्ट होने के 9 माह बाद भी नहीं हुई किसी की गिरफ्तारी
इस मामले में 4 आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 30 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच की गुणवत्ता पर गंभीर टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट के सहायक लोक अभियोजक साकेत कुमार के पत्र के माध्यम से यह तथ्य सामने आया कि जमानत खारिज होने के 9 माह बीत गए, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए रांची एसएसपी को प्रतिवेदन दायर करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले युवक को जबरन उठाने के मामले में गिरी थी गाज
बता दें कि कांके थानेदार के खिलाफ पहले से एक विभागीय कार्यवाही चल रही है। दरअसल, अनिल टाइगर हत्याकांड में कांके थाना में दर्ज कांड संख्या 90/2025 में अग्रिम जमानत मिलने और जमानत बांड भरने के बावजूद बिना किसी वारंट और कारण के कांके थानेदार ने देवब्रत नाथ शाहदेव को देर रात जबरन घर से उठा लिया और अवैध रूप से हिरासत में रखा। इस मामले में हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका (हेवियर्स कॉर्पस) दायर की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। हाईकोर्ट की फटकार के बाद थानेदार के खिलाफ कार्यवाही शुरू की गई।
Jharkhand High Court : दो-दो विभागीय कार्यवाही चलने पर भी कर रहे थानेदारी
कांके थानेदार के खिलाफ दो-दो विभागीय कार्यवाही चल रही है, लेकिन अभी भी वे अपने पद पर बने हुए हैं। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होना स्भाविक है। विभागीय कार्रवाई के दौरान प्रकाश रजक को उसी थाने में थानेदार के पद पर बनाए रखते हुए कार्रवाई शुरू की गई है। झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के नियम 9(1)(ए) के अनुसार, किसी सरकारी अफसर पर अगर अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो या चल रही हो तो उसे निलंबित करने या हटाने का नियम है। ऐसा इसलिए, ताकि किसी भी कारण जांच प्रभावित न हो।
SSP Ranchi : सभी थानेदार, डीएसपी और सिटी-ग्रामीण एसपी को भी निर्देश
इस मामले के सामने आने के बाद एसएसपी ने रांची के सभी थानेदार, इंस्पेक्टर और ओपी प्रभारियों को भी सख्त आदेश दिया है। एसएसपी ने आदेश में कहा है कि थानेदार खुद या आईओ के जरिए कोर्ट के रिकॉर्ड का समय से जांच कर इस तरह के मामलों को चिह्नित कर काईवाई करें। लापरवाही बरतने पर केस के आईओ और थानेदार के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही एसएसपी ने सभी डीएसपी को आदेश का पालन करने के लिए निर्देश दिया है। लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट करने को भी कहा गया है। एसएसपी ने सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी को भी लंबति मामलों की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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