Jamshedpur : जमशेदपुर में मानगो नगर निगम चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं वर्तमान में धनबाद जिला के पार्टी प्रभारी रहे राजकुमार श्रीवास्तव ने शनिवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा देने का एलान कर दिया है। उन्होंने मानगो में मेयर पद पर अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाने के लिए पार्टी छोड़ दी। भाजपा समर्थित प्रत्याशी संध्या सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की वजह से भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि को धक्का लगा है।

नोटिस मिलने के बाद लिया इस्तीफा देने का निर्णय
राजकुमार श्रीवास्तव ने इस्तीफा देने की घोषणा भाजपा का नोटिस मिलने के फौरन बाद की है। यह नोटिस शनिवार को भाजपा के जिला अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने राजकुमार श्रीवास्तव को दी है। राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव मानगो नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव मैदान में हैं। पार्टी की तरफ से पहले ही निर्देश जारी किया गया था कि पार्टी का कोई भी पदाधिकारी भाजपा समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगा। राजकुमार को समझाया गया था कि वह अपनी पत्नी का नामांकन वापस ले लें। लेकिन, राजकुमार का बागी रुख बरकरार रहा। उन्होंने पार्टी के नेताओं के आदेश की अनदेखी की। इसी वजह से उन्हें नोटिस जारी की गई। बाद में उनसे कहा कि वह अपनी पत्नी का साथ न दें और उनके लिए चुनाव प्रचार नहीं करें। वरना, उन पर कार्रवाई की बात कही गई थी।
नोटिस पर राजकुमार ने ली चुटकी
इस नोटिस पर चुटकी लेते हुए राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने भाजपा के लिए तब काम किया जब नेताओं के पास साइकिल हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि वह पार्टी का प्रचार करने साइकिल से निकलते थे। उन्होंने 45 साल भाजपा को दिए हैं। राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आज उनसे कहा जा रहा है कि वह अपनी पत्नी का साथ छोड़ दें। उन्होंने पत्रकारों से सवाल किया कि जिसके साथ सात फेरे लिए अब पार्टी उसी का साथ छोड़ने को कह रही है। राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इसी वजह से वह भाजपा से इस्तीफा दे रहे हैं।
सच्चे सिपाही की तरह की पार्टी की सेवा
राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने एक सच्चे सिपाही की तरह पार्टी की सेवा की है और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। लेकिन लंबे समय से पार्टी में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज ऐसे लोगों को सम्मान दिया जा रहा है जो केवल पद और धन कमाने के मकसद से पार्टी में आए हैं। जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता हाशिए पर चले गए हैं।
गलत बयान देने वालों को मिल रही जिम्मेदारी
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यक्रमों में गलत सार्वजनिक बयान देने वाले लोगों को जिम्मेदारी दी जा रही है, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं को नेताओं से मिलने तक से रोका जाता है। पहले जहां नेता कार्यकर्ताओं के घर ठहरते और भोजन करते थे, वही अब बड़े होटलों तक सिमट गए हैं। इसका असर यह हुआ है कि साल 2019 के बाद से झारखंड में पार्टी की हालत लगातार कमजोर होती जा रही है।
संगठन महामंत्री की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
राजकुमार श्रीवास्तव ने संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह पर भी पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और धनबल वाले लोगों की तरजीह देने का इल्ज़ाम लगाया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार को याद दिलाया, जिसमें पुराने कार्यकर्ताओं को टूटने न देने की बात कही गई थी, और कहा कि आज उसी विचार की अनदेखी हो रही है।उन्होंने साफ किया कि मानगो नगर निगम चुनाव गैर-दलीय है और यह किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं हो रहा है। उनकी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव मेयर पद की प्रत्याशी हैं और वे खुद भी पिछले 30 वर्षों से पार्टी की सेवा करती रही हैं। पार्टी द्वारा पत्नी का साथ छोड़ने के निर्देश को उन्होंने गलत बताते हुए मानने से इनकार कर दिया।
नेताओं के संपर्क नहीं करने से भी हैं आहत
राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नामांकन के बाद न तो प्रदेश और न ही केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे कोई संपर्क किया। यहां तक कि राष्ट्रीय महामंत्री अरुण कुमार सिंह के जमशेदपुर आगमन के दौरान भी उनसे मिलने की पहल नहीं की गई, जिससे उन्हें गहरी पीड़ा पहुंची।इन्हीं वजहों से आहत होकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला लिया। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि भाजपा छोड़ने के बाद वे किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे और राजनीति से सन्यास ले रहे हैं।

