रांची : राज्य में वाहनों के ownership transfer के दौरान NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जमा करने में देरी पर निर्धारित अतिरिक्त शुल्क सरकार को नहीं मिल पा रहा है, जिससे राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। परिवहन विभाग ने इसकी पड़ताल की है। यहां अधिकारियों ने माना कि मौजूदा प्रक्रिया में देरी से शुल्क की वसूली प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है।
परिवहन विभाग के सचिव ने इसे गंभीरता से लिया है। यह बताया गया है कि केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 81 के तहत यदि एनओसी निर्धारित समय पर जमा नहीं किया जाता है तो मोटरसाइकिल पर प्रतिमाह 300 रुपये तथा अन्य वाहनों पर प्रतिमाह 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाना चाहिए। लेकिन अधिकृत डीलरों के माध्यम से पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री और ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में यह शुल्क व्यवहारिक रूप से राज्य सरकार के खाते में नहीं पहुंच रहा।
स्वामित्व हस्तांतरण में हो रही है देरी से नुकसान
अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में पुराने वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण में देरी होती है। यदि प्रत्येक लंबित मामले में ‘विलंब शुल्क’ (लेट फाइन) की वसूली नहीं होती है, तो राज्य को हर वर्ष उल्लेखनीय राजस्व हानि हो सकती है। विशेष रूप से चारपहिया और वाणिज्यिक वाहनों के मामलों में यह नुकसान अधिक माना जा रहा है। ऑथराइज्ड डीलर को इस संबंध में कई निर्देश भी दिए गए। यह बात सामने आई कि ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप की प्रक्रिया की जाती है, परंतु ऑथराइज्ड डीलर द्वारा वाहन क्रय एवं विक्रय के दौरान राज्य सरकार को किसी भी प्रकार का राजस्व प्राप्ति नहीं होता।
मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज द्वारा द्वारा अधिकृत डीलरों को पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री में सुविधा देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें डीलर वाहन की सुपुर्दगी, RC renewel, duplicate RC, NOC और ownership transfer से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। लेकिन इसी व्यवस्था में Late fine की स्वतः गणना और वसूली का स्पष्ट system नहीं होने से राजस्व संग्रह प्रभावित हो रहा है।
अध्ययन का नया मॉडल तैयार होगा
परिवहन सचिव ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया का विस्तृत अध्ययन कर ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे देरी शुल्क की स्वचालित वसूली सुनिश्चित हो, राजस्व हानि रुके और वाहन हस्तांतरण प्रणाली पारदर्शी बने।

