रांची। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रबंधन शिक्षा का उद्देश्य केवल कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है जो समाज की चुनौतियों को समझे और उसके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएं। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से कहा कि वे थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल की भावना के साथ काम करें।
उन्होंने कहा कि भारत के विकास की असली ताकत गांवों, छोटे शहरों और स्थानीय समुदायों में है, इसलिए शिक्षा और प्रबंधन की क्षमता का उपयोग जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो ज्ञान, नेतृत्व क्षमता और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े।
आईआईएम रांची के दीक्षांत समारोह को किया संबोधित
उपराष्ट्रपति शनिवार को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रांची के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर 558 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जबकि सात मेधावी छात्रों को मेडल और उपाधि देकर सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीन वर्षों के बाद दोबारा आईआईएम रांची आकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है। झारखंड के पूर्व राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव रहा है और वे लगातार संस्थान की प्रगति पर नजर रखते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में आईआईएम रांची ने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जो गर्व का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कक्षा में पढ़ाई जाने वाली केस स्टडी विश्लेषणात्मक सोच को मजबूत करती है, लेकिन वास्तविक जीवन में निर्णय केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं लिए जाते, बल्कि उनमें मानवीय संवेदनाएं, विश्वास और सामाजिक प्रभाव भी जुड़े होते हैं।
हर निर्णय जिम्मेदारी के साथ लिया जाना चाहिए
उन्होंने कहा कि एक प्रबंधक के निर्णय का असर कई लोगों के जीवन, रोजगार और भविष्य पर पड़ सकता है, इसलिए हर निर्णय जिम्मेदारी के साथ लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सफलता केवल पद, वेतन या उपलब्धियों से नहीं मापी जानी चाहिए, बल्कि इस बात से तय होनी चाहिए कि व्यक्ति अपने मूल्यों और सिद्धांतों के साथ कितना दृढ़ रहता है। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे शॉर्टकट की संस्कृति से बचें और ईमानदारी, चरित्र तथा पारदर्शिता को अपने पेशेवर जीवन का आधार बनाएं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी मजबूत संस्था की नींव विश्वास, नैतिक नेतृत्व और जवाबदेही पर टिकी होती है। दीक्षांत समारोह में उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ते समय याद रखें कि समाज को लौटाना भी उतना ही आवश्यक है जितना व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना।
समारोह में इनकी रही उपस्थिति
समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार तथा अमित खरे सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
Read Also: Jharkhand Bureaucracy : नौकरशाही : मैडम सर की गाड़ी

