RANCHI : रांची के झिरी में गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा लगाए गए बायोगैस प्लांट का शनिवार को अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने निगम की टीम के साथ निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्लांट की कार्यप्रणाली, गीले कचरे के डिस्पोजल और उससे बनाए जाने वाले गैस व जैविक खाद निर्माण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने प्लांट के लिए हर दिन 100 टन कचरा उपलब्ध कराने का टास्क अधिकारियों को दिया है। साथ ही इसे तेजी से बढ़ाने का निर्देश संबंधित विभाग को दिया गया है।
बता दें कि द फोटोन न्यूज ने 16 मई को एक प्लांट की कैपेसिटी 150 मीट्रिक टन की, निगम आधा भी नहीं दे रहा गीला कचरा खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसमें हमने बताया था कि कैसे 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट को 75 टन गीला कचरा ही रांची नगर निगम दे रहा है। वहीं दूसरा प्लांट अभी आपरेशनल भी नहीं है।
अपर नगर आयुक्त ने कहा कि शहर से निकलने वाले अधिकतम गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करना नगर निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि उपलब्ध कराए जा रहे कचरे के कुछ हिस्से को प्लांट प्रबंधन द्वारा रिजेक्ट किया जा रहा है, क्योंकि उसमें सूखा और मिश्रित कचरा शामिल रहता है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अपर नगर आयुक्त ने गेल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि मिश्रित कचरा प्राप्त हो रहा है तो उसे अपने स्तर से भी अलग करने का प्रयास करें, ताकि कम से कम मात्रा में कचरा रिजेक्ट हो।
उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर के सभी मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी केंद्रों में प्राथमिक स्तर पर ही कूड़े का शत प्रतिशत सेग्रीगेशन सुनिश्चित किया जाए। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के बाद ही गीला कचरा प्लांट को उपलब्ध कराया जाए, ताकि डिस्पोजल सही तरीके से हो सके। बायोगैस प्लांट न केवल शहर के गीले कचरे के वैज्ञानिक डिस्पोजल का प्रभावी माध्यम है, बल्कि इससे स्वच्छ ऊर्जा के रूप में बायो सीएनजी व जैविक खाद का उत्पादन भी हो रहा है। जो पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक अपने घरों, प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक संस्थानों में दो अलग-अलग डस्टबिन का उपयोग करें।

