
रांची : झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन से राज्य की राजनीति में शोक की लहर है। हृदयाघात के कारण 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए थे और करीब तीन दशक के राजनीतिक संघर्ष के बाद उन्होंने गिरिडीह की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक उनकी सक्रिय भूमिका रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती थी।
1989 में झामुमो से शुरू हुआ सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्राथमिक सदस्य के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। संगठन के साथ लंबे समय तक काम करने के बाद वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर झारखंड मुक्ति मोर्चा का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौर में उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और स्थानीय राजनीति में अपनी पकड़ बनाने के लिए लगातार काम किया।
वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने गिरिडीह से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी कायम रखी। इस चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। लगातार चुनाव लड़ने और संगठन के बीच सक्रिय रहने के बाद वर्ष 2019 में उन्हें बड़ी सफलता मिली और उन्होंने पहली बार गिरिडीह सदर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की।
2019 और 2024 में लगातार जीत से मजबूत हुई पकड़
वर्ष 2019 की जीत के बाद सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह की राजनीति में झामुमो के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। लगातार दूसरी बार विधायक चुने जाने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
सरकार में उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी मिलने के कारण सरकार के कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
जेपीएससी-जेएसएससी विवाद में छात्रों से बातचीत में निभाई भूमिका
उच्च शिक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालने के दौरान सुदिव्य कुमार सोनू का सामना झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र असंतोष से भी हुआ। जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े विवादों के दौरान उन्होंने सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अगस्त 2026 में छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने छात्र प्रतिनिधिमंडलों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। सरकार की ओर से गठित मंत्री समूह में भी वह शामिल रहे। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, विवादित परीक्षाओं की जांच और छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर सरकार का पक्ष रखने के साथ उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से संवाद बनाए रखा।
हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में होती थी गिनती
सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में माना जाता था। संगठन में लंबे अनुभव के कारण वह पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर भी सक्रिय रहे। सरकार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर उनकी भूमिका सामने आती रही। उनके पास एक साथ कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। इसके कारण मंत्रिमंडल के भीतर भी उनकी सक्रियता बनी रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संगठनात्मक कामकाज और सरकार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम करने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता था।
सुदिव्य सोनू के निधन पर झामुमो ने कहा- अपूरणीय क्षति
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भावुक श्रद्धांजलि दी। पार्टी ने अपने संदेश में उनके असामयिक निधन को झामुमो परिवार, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। पार्टी ने उनके लंबे संघर्ष, सेवा और योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा स्मरण किया जाएगा।
झामुमो ने अपने श्रद्धांजलि संदेश के अंत में ‘अंतिम जोहार’ कहा। पार्टी के इस संदेश में सुदिव्य कुमार सोनू के साथ लंबे राजनीतिक संबंध और संगठन में उनके योगदान का उल्लेख किया गया।
हेमंत सरकार के कार्यकाल में चौथी बड़ी क्षति
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में मंत्रियों के निधन की एक और बड़ी घटना है। इससे पहले मंत्री हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का भी कार्यकाल के दौरान निधन हो चुका है। ऐसे में सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन झारखंड की राजनीति और सरकार के लिए महत्वपूर्ण क्षति के रूप में सामने आया है।
करीब तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहने वाले सुदिव्य कुमार सोनू ने संगठन के प्राथमिक सदस्य से लेकर मंत्री और लगातार दो बार विधायक बनने तक का राजनीतिक सफर तय किया। गिरिडीह की राजनीति में उनकी पहचान एक लंबे समय से सक्रिय नेता के रूप में बनी। उनके निधन से झामुमो ने अपने संगठन और सरकार के बीच सक्रिय भूमिका निभाने वाले एक महत्वपूर्ण नेता को खो दिया है।

