
रांची : झारखंड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कई चर्चित और संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है। इनमें कुछ मामलों में एजेंसी ने महत्वपूर्ण खुलासे कर आरोपियों को सजा तक पहुंचाया, जबकि कई जांचों की धीमी गति और निष्कर्षों को लेकर पीड़ित परिवार सवाल उठा रहे हैं। विनय महतो प्रकरण में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट से परिजन असंतुष्ट हैं, वहीं बोकारो की छात्रा से जुड़े मामले में CBI की जांच को बड़ी सफलता माना गया।
विनय महतो मामले में हत्या के प्रमाण नहीं मिलने का दावा
रांची के तुपुदाना ओपी क्षेत्र स्थित सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो की फरवरी 2016 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। प्रारंभिक पुलिस जांच में इसे हत्या का मामला माना गया और विद्यालय की एक शिक्षिका तथा उनके बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। हालांकि, वैज्ञानिक जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
विनय के पिता मनबहाल महतो के आग्रह और झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2022 में CBI ने मामले की जांच संभाली। लंबी छानबीन के बाद एजेंसी ने जून 2026 में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए मौत को दुर्घटना बताया। अब विनय के परिजन इस निष्कर्ष पर सवाल उठा रहे हैं और मामले की जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
बोकारो की छात्रा के मामले में मिली बड़ी सफलता
रांची के सदर थाना क्षेत्र में दिसंबर 2016 में बोकारो की एक छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का मामला सामने आया था। पुलिस लंबे समय तक इसकी गुत्थी नहीं सुलझा सकी, जिसके बाद जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। इस प्रकरण को झारखंड में CBI की सफल जांचों में गिना जाता है।
बकोरिया मुठभेड़ पर भी लगी थी जांच की मुहर
पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र स्थित बकोरिया में जून 2015 में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने 12 माओवादियों को मारने का दावा किया था। मृतकों के परिजनों ने मुठभेड़ को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की। हाईकोर्ट के निर्देश पर CBI ने मामले की पड़ताल की और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर झारखंड पुलिस की कार्रवाई को सही माना।
कई अन्य संवेदनशील मामले भी CBI के पास
रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र में डीपीएस छात्र अंतरिक्ष शनिग्रही की 2016 में हुई संदिग्ध मौत की जांच भी CBI कर रही है, लेकिन अब तक कोई अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है। इसके अतिरिक्त ईडी अधिकारियों से कथित मारपीट और सरकारी खाते से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की जिम्मेदारी भी एजेंसी के पास है। इन मामलों के निष्कर्षों पर अब पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।

