
रांची : झारखंड के गठन के बाद राज्य की राजनीति ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 15 नवंबर 2000 को अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद करीब 26 वर्षों के राजनीतिक सफर में झारखंड ने कई प्रमुख नेताओं को खोया। इनमें ऐसे मंत्री भी शामिल रहे, जिनकी मृत्यु उस समय हुई जब वे राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। किसी नेता की जान नक्सली हिंसा में गई, तो किसी का निधन गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुआ।
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के 6 सितंबर 2026 को असामयिक निधन के बाद मंत्री पद पर रहते जान गंवाने वाले नेताओं की यह सूची एक बार फिर चर्चा में है। सुदिव्य कुमार सोनू से पहले रमेश सिंह मुंडा, हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का निधन भी मंत्री पद पर रहते हुआ था।
रमेश सिंह मुंडा की नक्सली हमले में हुई थी हत्या
झारखंड में मंत्री पद पर रहते जान गंवाने वाले प्रमुख नेताओं में रमेश सिंह मुंडा का नाम सबसे पहले आता है। तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड के विधायक रहे रमेश सिंह मुंडा तत्कालीन अर्जुन मुंडा सरकार में मंत्री थे।
9 जुलाई 2008 को बुंडू के बारूहातु स्थित एक उच्च विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नक्सलियों ने हमला कर दिया था। अचानक हुई गोलीबारी में रमेश सिंह मुंडा की मौत हो गई। हमले में उनके दो अंगरक्षकों और एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया था। बाद में मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक पहुंची और आरोपियों के खिलाफ जांच तथा कानूनी कार्रवाई लंबे समय तक चलती रही।
हाजी हुसैन अंसारी का कोरोना के बाद हृदयाघात से निधन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और मधुपुर के विधायक हाजी हुसैन अंसारी का निधन भी मंत्री पद पर रहते हुआ था। उन्होंने 28 जनवरी 2020 को मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके कुछ ही महीनों बाद 3 अक्टूबर 2020 को रांची के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।
हाजी हुसैन अंसारी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे और उनका उपचार चल रहा था। बाद में उनकी जांच रिपोर्ट संक्रमण से मुक्त आई, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहीं। 3 अक्टूबर को हृदयाघात के कारण उनकी मौत हो गई। उनके निधन के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी। वह झारखंड सरकार में मंत्री बनने वाले पहले मुस्लिम नेताओं में प्रमुख रहे।
जगरनाथ महतो ने गंभीर बीमारी के बावजूद संभाली जिम्मेदारी
डुमरी के विधायक और तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में ‘टाइगर’ के नाम से जाना जाता था। कोरोना संक्रमण के बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई थी। बेहतर उपचार के लिए उन्हें चेन्नई ले जाया गया, जहां उनका फेफड़ा प्रत्यारोपण भी किया गया।
स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों के बावजूद जगरनाथ महतो झारखंड लौटे और मंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालते रहे। बाद में उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और उन्हें उपचार के लिए चेन्नई ले जाया गया। 6 अप्रैल 2023 को कई अंगों के काम करना बंद करने और संक्रमण के बाद उत्पन्न स्वास्थ्य जटिलताओं के बीच उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद डुमरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। इस चुनाव में उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत दर्ज की।
रामदास सोरेन का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन
झारखंड के शिक्षा मंत्री और घाटशिला विधायक रामदास सोरेन का निधन भी मंत्री पद पर रहते हुआ। 15 अगस्त 2025 को दिल्ली में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वह हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
2 अगस्त 2025 को घर में गिरने के बाद उन्हें मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था। हालत गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया। कई दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। 15 अगस्त को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था।
सुदिव्य कुमार सोनू का शिक्षक दिवस के अगले दिन निधन
अब इस सूची में झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का नाम भी जुड़ गया है। सुदिव्य कुमार सोनू के पास नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
जानकारी के अनुसार रात में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। 6 सितंबर 2026 को उनका निधन हो गया। शुरुआती जानकारी में हृदयाघात को उनकी मौत की वजह बताया गया है। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन का समय भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में रहा। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर वह शिक्षा और विद्यालय से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय थे। इसके अगले ही दिन उनके निधन की खबर सामने आई। अचानक हुई इस घटना से उनके समर्थकों, राजनीतिक सहयोगियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में शोक है।
झारखंड की राजनीति में मंत्री पद पर रहते पांच नेताओं की मौत
झारखंड के राजनीतिक इतिहास में मंत्री पद पर रहते इन पांच नेताओं का निधन अलग-अलग परिस्थितियों में हुआ। रमेश सिंह मुंडा की जान नक्सली हमले में गई, जबकि हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और सुदिव्य कुमार सोनू की मौत स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुई।
इन नेताओं ने अपने-अपने राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके निधन का असर केवल उनके परिवार और समर्थकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झारखंड की राजनीति और सरकार के कामकाज पर भी पड़ा। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के साथ मंत्री पद पर रहते जान गंवाने वाले नेताओं की यह सूची एक बार फिर राज्य के राजनीतिक इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय को सामने ले आई है।

