
पलामू : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के मारे जाने के बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के सामने नेतृत्व का संकट पैदा हुआ है। इस बीच पलामू के मनातू थाना क्षेत्र स्थित केदल गांव निवासी जोनल कमांडर शशिकांत गंझू संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गया है। झारखंड सरकार ने शशिकांत गंझू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जुड़े मामलों में भी वांछित बताया जाता है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ब्रजेश गंझू की मौत के बाद शशिकांत गंझू संगठन की कमान संभाल रहा है। उसका प्रभाव मुख्य रूप से पलामू और चतरा क्षेत्र में बताया जाता है। पुलिस के अनुसार, शशिकांत के खिलाफ पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के अलावा उत्तर प्रदेश में भी 50 से अधिक मामले दर्ज हैं।
माओवादी संगठन से शुरुआत, बाद में टीएसपीसी से जुड़ा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शशिकांत गंझू 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ा था और सबजोनल सदस्य के तौर पर सक्रिय रहा। बाद में उसकी नजदीकी ब्रजेश गंझू से बढ़ी और वह टीएसपीसी में शामिल हो गया। पुलिस का दावा है कि वह अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर संगठन की गतिविधियों को अंजाम देता रहा है।
पुलिस के साथ दो दर्जन से अधिक मुठभेड़ का दावा
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2010 के बाद शशिकांत गंझू की सुरक्षा बलों के साथ दो दर्जन से अधिक बार मुठभेड़ हो चुकी है। सितंबर 2025 में मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में भी वह मौके से निकल भागने में सफल रहा था। इस मुठभेड़ में पुलिस के दो जवान बलिदान हुए थे।
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