
घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में शनिवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव से निपटने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रवेश मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कुसुम कुमारी लकड़ा ने किया। उन्होंने मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और भावनात्मक मजबूती के महत्व पर प्रकाश डाला। गणित विभागाध्यक्ष कृष्णानंद दत्ता ने अनुशासित दिनचर्या और स्वस्थ आदतों को अपनाने पर जोर दिया। इतिहास विभाग की छात्रा मानवी हेम्ब्रम ने भी अपने विचार रखे।
राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने कहा कि किसी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास और वैज्ञानिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से भी आंकी जाती है। मानसिक रूप से सशक्त नागरिक परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकते हैं।
कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता के लिए आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी समस्याओं को साझा करने, तनाव को समझने तथा जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने की अपील की।
कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है। उन्होंने योग, व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
हार नहीं मानने का दिया संदेश
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में निराश होने के बजाय आत्मविश्वास और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पुस्तक-पठन, संगीत और योग जैसी गतिविधियों को मानसिक शांति एवं एकाग्रता के लिए उपयोगी बताया।
कुलाधिपति ने विद्यार्थियों से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग जनकल्याण के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, स्वतंत्र चिंतन और समस्या समाधान की योग्यता विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ तन, स्वस्थ मन और विकसित बौद्धिक क्षमता ही सशक्त समाज एवं विकसित भारत की आधारशिला है। विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समान महत्व देकर ही उनके सर्वांगीण विकास तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति, कुलसचिव, विभागाध्यक्षों, वक्ताओं एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
Read Also Ghatshila News : दाहीगोड़ा में घर का ग्रील काटकर 22 हजार रुपये व जेवरात की चोरी

