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सेहत से नहीं करें खिलवाड़, भूलकर भी नहीं खाएं ये मछली, भारत में है BANNED

by Rakesh Pandey
भूलकर भी नहीं खाएं ये मछली
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हेल्थ डेस्क/ नई दिल्ली : अगर आप मछली खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। दरअसल, बाजार में कई तरह की मछलियां बिक रही हैं। ऐसे में जब आप मछलियों की खरीदारी करने जाएं तो पूरी सावधानी बरतें। कहीं ऐसा न हो कि अनजाने में लेने के देने पड़ जाए।

पहचानकर करें खरीदारी, नहीं होगी दिक्कत

चूंकि, बाजार में ऐसा माना जा रहा है कि व्यापारी मुनाफा कमाने के लिए हाइब्रिड मांगुर को देसी मांगुर या बॉयलर मांगुर बता कर बेच रहे हैं। जबकि इसकी बिक्री पर रोक है। हालांकि, यह जांच का विषय है कि बिक्री हो रही है या नहीं। लेकिन आपको सावधान होने की जरूरत है।

इस मछली के बारे में लोगों में जागरूकता की भारी कमी है। मांगुर मछली के बारे में कुछ लोगों से पूछा गया कि यह सेहत के लिए क्यों खतरनाक है तो अधिकांश लोग इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्हें बस, इतना पता था कि मछली सेहत के लिए अच्छी होती है लेकिन आपको यह मालूम होना चाहिए कि मांगुर मछली आपके लिए जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में इसका सेवन करने से बचें।

भूलकर भी नहीं खाएं ये मछली

महाराष्ट्र में जब्त की गई तीन टन मांगुर

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की शेगांव शहर में धड़ल्ले से बिक रही प्रतिबंधित मांगुर मछली को लेकर वहां के स्थानीय प्रशासन ने बीते शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। बाजार से तीन टन मांगुर मछली जब्त की है। साथ ही तीन लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। इस प्रतिबंधित मछली की तस्करी करने के आरोप में 8 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन 3 टन मछलियों को जिंदा ही दफन किया गया है, जिसकी कीमत 12 लाख 40 हजार रुपए आंकी गई है।

जानें, मांगुर को ‘थाई मांगुर’ क्यों कहा जाता है

आपके मन में सवाल चलता होगा कि आखिर मांगुर को ‘थाई मांगुर’ क्यों कहा जाता है? तो आइए इसके बारे में हम मछली विक्रेता रोहन सिंह से समझते हैं। रोहन सिंह कहते हैं कि वे वर्ष 1990 से ही मछली के कारोबार से जुड़े हैं। मांगुर मछली को ‘थाई मांगुर’ क्यों कहा जाता है? इसपर जवाब देते हुए वे कहते हैं कि मांगुर मछली थाईलैंड की प्रजाति है। ये मछली वहीं सबसे ज्यादा पाई जाती है।

मांसाहारी होती है यह मछली, खाने से सेहत हो सकती है खराब

मांगुर मछली को लेकर पूर्व में कई शोध रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मांगुर मछलियों के अंदर घातक हेवी मेटल्स जिसमें आर्सेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, मरकरी, लेड अधिक पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हानिकारक है।

थाई मांगुर के द्वारा प्रमुख रूप से गंभीर बीमारियां, जिसमें हृदय संबंधी बीमारी के साथ न्यूरोलॉजिकल, यूरोलॉजिकल, लीवर की समस्या, पेट एवं प्रजनन संबंधी बीमारियां और कैंसर जैसी घातक बीमारी अधिक हो रही है। यह मछली पानी इकोसिस्टम को खाकर खत्म कर देती है। यह मछली मांसाहारी है, यह इंसानों का भी मांस खाकर बढ़ जाती है।

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भारत में सन 2000 में लगी रोक

मांगुर मछली से होने वाले नुकसान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2000 में देशभर में थाई मांगुर मछली के पालन और बिक्री पर रोक लगा दी है लेकिन इसके बावजूद भी बिक्री हो रही है। रिपोर्ट में पाया गया है कि यह मछली हर तरफ से नुकसान पहुंचाती है। लोगों की सेहत से लेकर इसका पालन करने वाले स्थानीय व जलीय पर्यावरण को भी खतरे की संभावना है।

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