नई दिल्ली : भारत में ईद उल-अजहा (जिसे आम बोलचाल में बकरीद या बकरा ईद कहा जाता है) 7 जून 2025 को मनाई जाएगी। यह ऐलान शिया-सुन्नी चांद कमेटी द्वारा 28 मई की शाम ईद के चांद के दीदार के बाद किया गया।
ईद उल-अजहा इस्लामी कैलेंडर के अंतिम महीने जुल हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। इस्लामी परंपरा के अनुसार यह पर्व हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद में पूरे मुस्लिम समुदाय द्वारा श्रद्धा से मनाया जाता है।
सऊदी अरब में 6 जून को मनाई जाएगी बकरा ईद
सऊदी अरब में 27 मई की शाम को चांद नजर आया, जिसके आधार पर वहां 6 जून 2025 को बकरीद मनाई जाएगी। वहीं भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में चांद 28 मई की शाम को देखा गया, जिसके बाद यहां 7 जून को ईद उल-अजहा मनाई जाएगी।
शिया-सुन्नी चांद कमेटी ने किया आधिकारिक ऐलान
शिया और सुन्नी चांद कमेटियों ने एकमत से पुष्टि की है कि 1446 हिजरी के जुल हिज्जा महीने की शुरुआत 29 मई से होगी।
इसकी पुष्टि के साथ ही पूरे भारत में बकरीद की तारीख 7 जून 2025 तय कर दी गई है।
बकरीद पर जानवर की कुर्बानी का महत्व
बकरीद पर सुबह की ईद की विशेष नमाज के बाद हजरत इब्राहीम की कुर्बानी की याद में जानवर की कुर्बानी दी जाती है।
कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को और तीसरा हिस्सा स्वयं के उपयोग के लिए रखा जाता है। यह त्योहार त्याग, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।
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