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Jamshedpur News : जमशेदपुर में अमेरिकन हरे सेब की बहार, LBSM के रिटायर्ड प्रोफेसर ने पेश की खेती की मिसाल

Jamshedpur News : सेब की खेती ठंडे इलाकों जैसे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में ही मुमकिन होती है। लेकिन, लौह नगरी जमशेदपुर में एक रिटायर्ड प्रोफेसर बीएन प्रसाद ने इस धारणा को बदल दिया है।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : आमतौर पर सेब की खेती ठंडे इलाकों जैसे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में ही मुमकिन होती है, ऐसा माना जाता है।
लेकिन, लौह नगरी जमशेदपुर में एक रिटायर्ड प्रोफेसर बीएन प्रसाद ने इस धारणा को बदल कर रख दिया है। शहर के रिटायर्ड प्रोफेसर ने गर्म इलाके में अमेरिकन हरे सेब उगाकर एक अनोखी मिसाल पेश की है।

साल 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद रिटायर्ड प्रोफेसर ने खाली बैठने के बजाय कुछ नया करने का फैसला लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने जमशेदपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर गालूडीह के पास नारगा गांव में लगभग दो बीघा रकबे की जमीन पर सेब की खेती शुरू की।

उन्होंने ‘एचआरएमएन-99’ प्रजाति के सेब लगाए हैं, जिसे हिमाचल प्रदेश के प्रगतिशील किसान हरीमन शर्मा ने विकसित किया है। इस खास किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 50 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी में भी फल दे सकता है। इस नवाचार के लिए हरीमन शर्मा को पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है।

अच्छी पैदावार दे रहे हैं खेत में मौजूद 75 पेड़

प्रोफेसर बीएन प्रसाद के खेत में इस समय करीब 75 सेब के पौधे हैं और उनमें अच्छी पैदावार हो रही है। बाजार में इन सेबों की कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलो तक है। लेकिन खास बात यह है कि वह इनका व्यावसायिक उपयोग नहीं करते। वे इन फलों को अपने दोस्तों, परिवार और गांव के लोगों में बांटकर खुशी महसूस करते हैं।

खुद को सक्रिय रखने के लिए शुरू किया खेती का काम

रिटायर्ड प्रोफेसर बीएन प्रसाद द फोटान न्यूज को बताया कि खेती करने का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि खुद को सक्रिय और सेहतमंद रखना भी है। वे रोजाना खेत में जाकर पौधों की देखभाल करते हैं और जैविक तरीके से खेती पर जोर देते हैं। वह जमीन पर जाकर नियमित कटाई-छंटाई, सिंचाई और प्राकृतिक खाद का विशेष ध्यान रखते हैं।

समस्तीपुर के किस परिवार से हैं रिटायर्ड प्रोफेसर

बिहार के समस्तीपुर से जुड़े किसान परिवार से आने वाले प्रोफेसर प्रसाद के भीतर खेती के प्रति लगाव पहले से ही रहा है। शहर में यह संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने गांव में जमीन लेकर अपने इस शौक को धरती पर उतारा।

आज उनकी यह पहल न केवल उन्हें सक्रिय और स्वस्थ बनाए हुए है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। यह कहानी बताती है कि अगर सोच नई हो और इरादे मजबूत हों, तो किसी भी हालात में नई राह बनाई जा सकती है।

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