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जयपुर में एक और बड़ा हादसा, CO2 गैस प्लांट में हुआ रिसाव, चारों ओर सफेद चादर सी फैल गई

वॉल्व सही तरीके से नहीं लगने के कारण गैस के प्रेशर से वॉल्व टूट गया। गैस का लीकेज होने पर विजिबिलिटी शून्य हो गई। मौके पर फायर बिग्रेड की दो गाड़ियों से पानी की बौछार की गई,

by Reeta Rai Sagar
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Jaipur Gas Leakage: जयपुर में एक बार फिर एक बड़ा हादसा हो गया है। मंगलवार की दोपहर बाद जयपुर में गैस रिसाव से एक बार फिर हड़कंप मच गया। जयपुर के विश्वकर्मा इलाके के रोड नंबर 18 पर स्थित गैस फिलिंग प्लांट से रिसाव हुआ। जिससे पूरे इलाके में गैस की सफेद चादर सी बिछ गई।

गैस रिसाव से अफरातफरी जैसी स्थिति हो गई। खबरों के अनुसार, जयपुर के जिस गैस फिलिंग प्लांट में यह भयावह रिसाव हुआ, वहां टंकियों में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भरने का काम होता था। रिसाव होते ही पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची।

Rescueटीम ने मौके पर पहुंच बंद की वॉल्व

सिविल डिफेंस की टीम ने मौके पर पहुंचते ही वॉल्व को बंद कर, गैस के रिसाव को रोका। सूचना मिलते ही मौके पर दमकल, पुलिस बल व एंबुलेंस की गाड़ियां पहुंची। वॉल्व बंद करने के बाद भी गैस का रिसाव काफी हो गया था और पूरे इलाके में तेजी से फैल गया था। इलाके में मौजूद आसपास की गाड़ियों पर बर्फ की चादर की तरह परत चढ़ गई थी।

पहले भी हो चुके है कई हादसे

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही जयपुर में अजमेर हाईवे पर भांकरोटा के पास गैंस टैंकर हादसा हुआ था और उससे लगी आग में 20 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद से ही पूरे प्रदेश में यातायात नियमों में सख्ती बरती जा रही है। जयपुर-अजमेर हाईवे पर हुए हादसे के कुछ दिनों बाद ही जयपुर से ही मिथेन गैस लदा एक टैंकर भी पलट गया था, अभी इस घटना में हुए नुकसान की भरपाई भी नहीं हुई थी कि अब जयपुर में गैंस फिलिंग प्लांट से रिसाव की घटना सामने आई है।

पुलिस ने बताया….

इस मामले में असिस्टेंट फायर ऑफिसर विश्वकर्मा भंवर सिंह हाड़ा ने बताया कि जयपुर में रोड नंबर-18 विश्वकर्मा में अजमेरा गैस प्लांट के नाम से ऑक्सीजन प्लांट है। प्लांट में दो बड़े टैंकर CO2 गैस के स्टोरज के लिए बने हुए हैं। रविवार दोपहर को गैस टैंकर के जरिए कार्बन ऑक्साइड गैस स्टोरेज के लिए आई थी।

जिसके बाद स्टोरज टैंकर में गैस को ट्रांसफर कर वॉल्व बंद कर दिया गया। वॉल्व सही तरीके से नहीं लगने के कारण गैस के प्रेशर से वॉल्व टूट गया। गैस का लीकेज होने पर विजिबिलिटी शून्य हो गई। मौके पर फायर बिग्रेड की दो गाड़ियों से पानी की बौछार की गई, जिसके 40 मिनट बाद स्थिति पर पूरी तरह काबू पाया गया। चूंकि सीओटू गैस ठंडी होती है, इसलिए नीचे बैठ गई, इससे ऐसा लगा कि बर्फ की चादर सी बिछ गई।

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