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Ghatshila News: झारखंड में बंगला भाषा के संरक्षण को ले आगे आई समिति; सीएम के नाम ज्ञापन में लिखा- उपेक्षा के कारण बच्चे छोड़ रहे पढ़ाई

by Rajesh Choubey
Bengali Language Preservation in Jharkhand
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घाटशिला : झारखंड बंगलाभाषी उन्नयन समिति की ओर से शुक्रवार को झारखंड में “बांग्ला अकादमी के गठन की मांग को लेकर सीएम के नाम बीडीओ को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें कहा गया है कि झारखंड विधानसभा के हाल ही में संपन्न बजट सत्र के दौरान निरसा (धनबाद) के विधायक अरूप चटर्जी द्वारा सदन में झारखंड में “बांग्ला अकादमी” के गठन की मांग उठाई गई।

समिति ने सीएम का ध्यान आकृष्ट कराते हुए निवेदन किया है कि अविभाजित बिहार में वर्ष 1986 में “बिहार बांग्ला अकादमी” का गठन किया गया था, जो वर्तमान में भी सक्रिय रूप से कार्यरत है। उस समय दक्षिण बिहार (वर्तमान झारखंड) के बांग्लाभाषी बहुल क्षेत्रों की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई थी।

बांग्ला पाठ्यपुस्तकों एवं योग्य शिक्षकों का है अभाव

उल्लेखनीय है कि झारखंड के 24 जिलों में से लगभग 16 जिले बांग्लाभाषी बहुल हैं, जहां बांग्ला भाषा जनसंपर्क की प्रमुख भाषा के रूप में प्रयुक्त होती है। इसके बावजूद, झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी बांग्ला भाषा, संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कोई ठोस सरकारी पहल नहीं की गई है। फलस्वरूप, राज्य के बांग्ला माध्यम विद्यालयों में बांग्ला भाषा में पठन-पाठन कार्य लगभग ठप हो चुका है, जिसका मुख्य कारण बांग्ला पाठ्यपुस्तकों एवं योग्य शिक्षकों का अभाव है।

बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का मिला है दर्जा

इस कारण झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र स्कूल छोड़ने को विवश हो रहे हैं जिनमें बांग्लाभाषी छात्रों की संख्या काफी है। मातृभाषा में शिक्षा के अभाव के कारण ये छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। यह भी उल्लेख करना प्रासंगिक है कि “बांग्ला” भारत की एक प्राचीन एवं समृद्ध भाषा है, जिसे भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल किया गया है। साथ ही वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा इसे “शास्त्रीय भाषा” का दर्जा भी प्रदान किया गया है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में मुख्यमंत्री से निवेदन किया गया है कि झारखंड के लगभग 42 प्रतिशत बांग्लाभाषी नागरिकों की भावनाओं एवं शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में “बांग्ला अकादमी” के गठन की प्रक्रिया यथाशीघ्र प्रारम्भ किया जाए।

ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से देवी प्रसाद मुखर्जी, तापस चटर्जी, कंचन कर, सुशांत सीट, शिल्पी सरकार, कांतों लाल दास, मिठू विश्वास, साधू चरण पाल, साधना पाल सहित काफी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे।

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