Jamshedpur : जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने की।
अपने स्वागत संबोधन में प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक युग में गुरु-शिष्य के बीच वह आत्मीय संबंध नहीं रह गया है, जो प्राचीन काल में शिक्षा की आत्मा हुआ करता था।
आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ. नीता सिन्हा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की तुलना आधुनिक शिक्षा पद्धति से करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को केवल रोजगारपरक नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिकता और विवेक से भी सम्पन्न बनाती है।
डॉ. प्रियंका सिंह ने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए विषय से संबंधित भूमिका प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी (बिहार) के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. प्रसून दत्त सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सूचना का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के परिमार्जन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। वेदों और गीता के माध्यम से यह जीवन को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि प्रदान करती है।

प्रो. सिंह ने कहा कि आज का समाज भावनाशून्यता और प्रकृति-संकट से जूझ रहा है, जिसका समाधान प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में निहित है। इसमें सर्वांगीण विकास, नैतिक चेतना और विश्व बंधुत्व के सूत्र समाहित हैं। संगोष्ठी के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सबिता पॉल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. रुचिका तिवारी ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. ब्रजेश कुमार, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. पुष्पा तिवारी, डॉ. पुष्पा सिंह, शोभा देवी, डॉ. स्वाति वत्स, के. ईश्वर राव, सुबोध कुमार, डॉ. डुमरेंद्र राजन, स्वरूप मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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