Home » BIT मेसरा छात्र की मौत पर हाई कोर्ट सख्त : VC, DGP सहित कई अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश

BIT मेसरा छात्र की मौत पर हाई कोर्ट सख्त : VC, DGP सहित कई अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश

अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के नियम-7 का सीधा उल्लंघन है। इस एक्ट के तहत जांच का अधिकार DSP रैंक के अधिकारी को ही होता है।

by Reeta Rai Sagar
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रांची : BIT मेसरा पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र राजा पासवान की संदिग्ध मौत के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, डीन और रजिस्ट्रार के साथ-साथ राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी 13 जून को दोपहर 2.15 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

यह मामला BIT मेसरा के हॉस्टल में छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद राजा पासवान की मौत से जुड़ा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, छात्र के शरीर पर 10 से अधिक गंभीर चोटों के निशान मिले हैं, जिससे हिंसा की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

मामले से जुड़ी मुख्य बातें

घटनास्थल
BIT मेसरा का हॉस्टल परिसर, जहां छात्रों के बीच झड़प हुई और एक छात्र की मौत हो गई।

कानूनी चूक का आरोप

पीड़ित अनुसूचित जाति वर्ग से था, लेकिन इस गंभीर मामले की जांच उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) स्तर के अधिकारी द्वारा की गई, जो अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के नियम-7 का सीधा उल्लंघन है। इस एक्ट के तहत जांच का अधिकार DSP रैंक के अधिकारी को ही होता है।

अदालत की सख्ती और चिंता

न्यायाधीश संजय प्रसाद ने इस मामले को शिक्षा संस्थान के भीतर हुई गंभीर हिंसा बताते हुए गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में भारी लापरवाही हुई है, जो न केवल न्याय में बाधा बन रही है, बल्कि पीड़ित परिवार के अधिकारों का हनन भी कर रही है। न्यायालय का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच अनिवार्य है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

अगली सुनवाई की तैयारी

झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जून 2025 तय की है। इस दिन अदालत संबंधित अधिकारियों से पूछेगी…

• मौत की जांच में उनकी भूमिका क्या रही।
• अनुसंधान किस स्तर पर और किस अधिकारी द्वारा किया गया।
• अब तक जांच में क्या प्रगति हुई।

BIT मेसरा जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में छात्र की संदिग्ध और हिंसक मौत न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि अनुसूचित जाति उत्पीड़न कानून की अनदेखी की ओर भी इशारा करती है। झारखंड हाई कोर्ट की सक्रियता से यह उम्मीद बंधी है कि पीड़ित छात्र के परिवार को न्याय मिलेगा और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।

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