गुजरात : खेड़ा जिले के मुलजीभाई पटेल यूरोलॉजिकल किडनी अस्पताल में एक ब्रेन डेड महिला का लिवर, किडनी और आंखें दान की गईं, जिससे पांच लोगों को नया जीवन मिला। यह प्रेरणादायक घटना महेशभाई पटेल और उनकी पत्नी भानुमतिबेन के जीवन में एक दुखद लेकिन साहसिक मोड़ लेकर आई।
9 महीने पहले बेटे को खोने के बाद अंगदान की दिशा में लिया महत्वपूर्ण कदम
महेशभाई पटेल और उनकी पत्नी भानुमतिबेन की ज़िन्दगी में 9 महीने पहले एक गहरा दुख आया था जब उन्होंने अपने बेटे परिमल को खो दिया था। परिमल को फेफड़े की गंभीर बीमारी थी और समय पर फेफड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी जान चली गई। इस दुःखद अनुभव ने महेशभाई और उनकी पत्नी को यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि वे भविष्य में अंगदान जरूर करेंगे, ताकि किसी और को नया जीवन मिल सके।
ब्रेन डेड मां ने 5 लोगों को दी नई जिंदगी
4 दिसंबर को भानुमतिबेन बाथरूम में गिर गईं, जिसके कारण उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया। इसके बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। महेशभाई पटेल और उनके परिवार ने अपने दर्द को सहते हुए अपनी पत्नी के अंगदान का फैसला किया। 5 दिसंबर को भानुमतिबेन के अंगदान से उनके लिवर, दोनों किडनी और दोनों आंखें दान की गईं। लिवर को अहमदाबाद सिविल अस्पताल भेजने के लिए विशेष वैन में भेजा गया, जबकि किडनियां नडियाद के मुलजीभाई पटेल यूरोलॉजिकल अस्पताल और आंखें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में दान की गईं।
अंगदान से मिले जीवनदायिनी अवसर
इन अंगों से कुल पांच लोगों को नई जिंदगी मिली। इनमें से एक 72 वर्षीय बुजुर्ग को भानुमतिबेन की किडनी मिली, जबकि 42 साल के एक मरीज को भी नया जीवन प्राप्त हुआ। महेशभाई पटेल ने कहा कि उनकी पत्नी के अंगदान से अब पांच लोगों को जीवन मिलेगा, जिससे उनका परिवार काफी संतुष्ट और गर्वित है।
समाज के लिए प्रेरणा
महेशभाई पटेल का यह कदम समाज के लिए एक अनूठी मिसाल है। उन्होंने बताया कि बेटे की मौत के बाद उन्होंने यह तय किया था कि वे अंगदान के माध्यम से समाज की मदद करेंगे। मुलजीभाई यूरोलॉजिकल हॉस्पिटल के डॉ. दिनेश प्रजापति ने भी महेशभाई के फैसले की सराहना की और कहा कि इस तरह के फैसले मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान है।
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