India-Canada Row: कनाडा के ब्रैम्पटन और मिसिसागा में हिंदू मंदिरों पर हुए हमले के खिलाफ कनाडा में रहने वाले भारतीयों ने प्रदर्शन किया। इस मामले में कनाडा के एक पुलिस वाले को सस्पेंड कर दिया गया है। कनाडा की स्थानीय मीडिया सीबीसी के अनुसार, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा फैलने की खबर है। इस मामले में तीन अन्य लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं।
शांति भंग करने का आरोप
दूसरी ओर कनाडा में रहने वाले भारतीयों का आरोप है कि कनाडा की पुलिस पक्षपात कर रही है। ब्रैम्पटन में रहने वाले एक 23 वर्षीय व्यक्ति पर हथियार से हमला करने का आरोप लगा है। इसके अलावा दो अन्य व्यक्तियों पर 5 हजार डॉलर (4,20,668 रुपये) की धोखाधड़ी और एक 43 साल के व्यक्ति को भी शांति भंग करने और अधिकारियों पर हमला करने का आऱोपी बनाया गया है।
पुलिसकर्मी भी खालिस्तान समर्थकों के साथ
अधिकारियों ने बताया कि जिस कनाडाई पुलिस ऑफिसर को सस्पेंड किया गया है, उसे खालिस्तान समर्थकों के प्रदर्शन में भाग लेते देखा गया था। उसकी पहचान हरिंदर सोही के रूप में हुई, जो कि पील क्षेत्रीय पुलिस में सार्जेंट के पद पर कार्यरत था। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पुलिस कर्मी खालिस्तान का झंडा लिए उन लोगों के साथ खड़ा था, जो भारत निरोधी नारे लगा रहे थे। हालांकि पील पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में भाग लेने वाला पुलिस कर्मी उस वक्त ऑफ ड्यूटी था।
कनाडा पुलिस पर भी भेदभाव के आरोप
बीते दिनों कनाडा के कई हिंदू मंदिरों में हमले की खबर आई। टोरंटो के रहने वाले भारतीय समुदाय के एक व्यक्ति राज शर्मा ने बताया कि हमारे मंदिर शांति और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। इस तरह से मंदिरों को निशाना बनाना न केवल संपत्ति पर, बल्कि आस्था पर भी हमला है। उनका आऱोप है कि कनाडा के कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस मामले में लापरवाही दिखा रही है। भारतीय मूल के कानाडाई नागरिक ने बताया कि वे इस घटना से हैरान और निराश हैं। नागरिकों का कहना है कि कनाडा की पुलिस भेदभाव कर रही है।
खालिस्तानी नारे भी लिखे गए
टोरंटो और वैंकूवर जैसे शहरों के भारतीय समुदाय के नेताओं सहित कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भी इस हमले की निंदा की। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि हिंदू मंदिरों की दीवारों पर खालिस्तानी नारे भी लिखे जा रहे हैं। कई जगहों पर हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है।
पीएम मोदी ने की कड़ी निंदा
4 नवंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर हिंदू मंदिर पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने लिखा कि मैं कनाडा में एक हिंदू मंदिर पर जाबूझकर हुए हमले की कड़ी निंदा करता हूं। हमारे राजनयिकों को डराने-धमकाने की कायरतापूर्ण कोशिश भी उतनी ही भयावह है। हिंसा के ऐसे कृत्य कभी भी भारत के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते हैं। हम कनाडा की सरकार से न्याय सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने की उम्मीद करते हैं।
क्या है मामला
रविवार को कनाडा के ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर के भीतर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया। कहा जा रहा है कि 3 नवंबर को हुए इस हमले को खालिस्तान समर्थकों ने अंजाम दिया था। इस घटना से संबंधित एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया गया है, जिसमें कुछ लोग हाथों में पीले रंग का झंडा लिए मंदिर के भीतर प्रवेश करते देखे जा सकते हैं।
कनाडा के हिंदू फोरम ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है कि विचलित कर देने वाली तस्वीरें। खालिस्तानियों ने ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर पर हमला किया है। यह स्वीकार्य नहीं है! इस पर कार्रवाई करें और कैनेडियन्स की सुरक्षा करें। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और स्थानीय पुलिस को टैग किया गया है।
भारतीय मूल के कनाडाई सांसद ने कहा
भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्र आर्या की प्रतिक्रिया आई है, उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज कनाडाई खालिस्तानी चरमपंथियों ने सीमा पार कर दी है। ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर के भीतर भक्तों पर हुआ ये हमला हमें बताता है कि कनाडा में खालिस्तान चरमपंथियों की हिंसा की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं।
हिंदुओं पर हमले के जवाब में आगे आर्या ने लिखा है कि मुझे लगने लगा है कि खालिस्तानियों ने सफलतापूर्वक कनाडा की न्याय व्यवस्था को भेद दिया है। इसमें कोई संशय नहीं है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खालिस्तानी चरमपंथियों को खुली छूट दी जा रही है। अपने पोस्ट में आगे उन्होंने कहा कि जैसा कि मैं पहले भी कहता आ रहा हूं, हिंदू कनाडाई समुदाय की सुरक्षा के लिए हमें आगे आना होगा और राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराना होगा।
कनाडाई पीएम ने क्या कहा
इस घटना पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो की भी प्रतिक्रिया आई, उन्होंने कहा कि ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है। सभी कनाडाई नागरिकों को सुरक्षा के साथ अपने धर्म को मानने की स्वतंत्रता है।

