चाईबासा : डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन यहां इस छवि पर दाग लगते नजर आ रहे हैं। यह मामला झारखंड में पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर का है, जहां इलाज के बहाने नाबालिग ने डाक्टर पर अभद्र व्यवहार और छेड़खानी की कोशिश के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जगन्नाथपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी चिकित्सक पर छेड़खानी का आरोप लगाया है।

कस्तूरबा की छात्राओं ने वार्डन को लिखित शिकायत देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। मामला की गंभीरता को देखते हुए वार्डन लक्ष्मी पाड़िया ने तत्काल इसकी रिपोर्ट जिला शिक्षा विभाग और सिविल सर्जन को भेजी है। इसके बाद से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। बताया जाता है की शिकायत के बाद एक टीम ने स्कूल में आकर छात्राओं से पूरे मामले की जानकारी ली है। हालांकि, इसके बाद अबतक क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
छात्राओं का आरोप है कि बीमार छात्रा के इलाज के दौरान डॉक्टर ने उस पर अभद्र टिप्पणियां कीं। शिकायत पत्र में छात्राओ ने एक गंभीर आरोप भी लगाया है। इसमें कहा गया कि डॉक्टर ने पहले भी छात्राओं को अकेले कमरे में बुलाने की कोशिश की थी। छात्राओं ने कहा कि 2 फरवरी 2026 को इलाज के नाम पर अभिभावकों और साथियों को बाहर निकाल दिया गया, जिससे उनके बीच असुरक्षा और डर का माहौल बन गया।
क्या कहा सिविल सर्जन ने
पश्चिमी सिंहभूम जिले की सिविल सर्जन डॉ. भारती मिंज ने घटना पर कुछ विस्तार जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। इसकी जांच की जा रही है।
क्या कहा प्रभारी डॉक्टर ने
सीएचसी प्रभारी डॉ जयंतो कुमार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे खुद को पद से हटाने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि अस्पताल में 36 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने चुनौती दी है कि यदि कोई मामला है, तो उसे साक्ष्यों के साथ सामने लाया जाए। पूरा आरोप बेबुनियाद और साजिश है।

