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CM Hemant Soren: CM हेमंत सोरेन की बढ़ीं मुश्किलें, बड़गाईं जमीन मामले में PMLA कोर्ट से आरोप तय

कानूनी प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने हुए पेश

by Kanchan Kumar
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​रांची : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कानूनी अड़चनें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रांची की बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में स्पेशल PMLA अदालत ने सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश हुए।

​गौरतलब है कि इस मामले में कुल 17 आरोपी शामिल थे, जिनमें से 16 लोगों के खिलाफ अदालत पहले ही चार्ज फ्रेम कर चुकी थी। अब इस सूची में राज्य के मुख्यमंत्री का नाम भी शामिल हो गया है।

8.86 एकड़ बेशकीमती जमीन से जुड़ा है मामला

​पूरा मामला रांची के बड़गाईं इलाके की 8.86 एकड़ की उस बेशकीमती जमीन से जुड़ा है, जिस पर अवैध कब्जे और हेरफेर का आरोप है। ईडी की जांच के मुताबिक, इस जमीन के सरकारी कागजातों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और अवैध तरीके से जमीन को हथियाने का प्रयास हुआ।

​इन्हीं सबूतों के आधार पर जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री समेत कई अधिकारियों और बिचौलियों पर अभियोजन शिकायत दर्ज की थी। इस मामले में तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिपिन सिंह, राजकुमार पाहन, अफसर अली और मोहम्मद सद्दाम हुसैन जैसे अन्य प्रमुख नाम भी आरोपी के रूप में शामिल हैं। फिलहाल कोर्ट में इन आरोपों को कानूनी रूप से साबित किया जाना बाकी है।

ऊपरी अदालत से भी फौरी राहत नहीं

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े चर्चित मामले में फिलहाल ऊपरी अदालत से कोई फौरी राहत नहीं मिल पाई है। हाई कोर्ट ने मामले की कानूनी प्रक्रिया पर रोक लगाने या राहत देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद अब पूरा दारोमदार निचली अदालत विशेष पीएमएलए कोर्ट के फैसले पर टिक गया था।

​हाई कोर्ट के रुख के बाद अब आज शाम 4:15 बजे पीएमएलए की विशेष अदालत में इस केस की महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। आज की यह कानूनी हलचल मुख्यमंत्री सोरेन के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है।

ED का कड़ा रुख

इस पूरे मामले में ​जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने निचली अदालत के सामने कई ठोस दस्तावेज और सबूत पेश किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि रांची में मुख्यमंत्री आवास की आड़ में बड़े पैमाने पर जमीनों के फर्जी दाखिल-खारिज और अवैध कब्जे का खेल रचा गया, जिसमें सीएम की सीधी भूमिका रही है। इसी आधार पर ईडी कोर्ट से जल्द से जल्द आरोप गठित कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग कर रही है।

​गौरतलब है कि इसी जमीन घोटाले से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पहले जेल भी जाना पड़ा था, जबकि रांची के तत्कालीन जिलाधिकारी समेत कई अन्य बड़े चेहरों की भी इस केस में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

​अब देखना दिलचस्प होगा कि विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी की दलीलों के जवाब में बचाव पक्ष के वकील क्या काट ढूंढते हैं और अदालत आज आरोप गठन पर क्या रुख अपनाती है।
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