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Jharkhand politics: ​ऊंटों पर सवार हो लोकभवन घेरने निकले झामुमो कार्यकर्ता, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े

​वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, बांग्लादेशी कहकर नाम हटाने के दावे पर बोला जोरदार हमला

by Kanchan Kumar
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​रांची : ​झारखंड में वोटर लिस्ट और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचा सियासी घमासान अब लोक भवन के दरवाजे तक पहुंच गया है। बुधवार को राजधानी रांची की सड़कों पर एक अनोखा ही नजारा देखने को मिला, जब झामुमो JMM के कार्यकर्ता अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराने के लिए ऊंटों पर सवार होकर निकल पड़े।

​पूरे राज्य के अलग-अलग प्रखंडों से आए हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम सबसे पहले रांची यूनिवर्सिटी के फुटबॉल ग्राउंड में इकट्ठा हुआ। वहां से नारों और झंडों के साथ यह विशाल जुलूस लोक भवन का घेराव करने के लिए रवाना हुआ। सड़कों पर ऊंटों का यह काफिला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

​11 करोड़ की आबादी में 13 करोड़ बांग्लादेशी कैसे?

​प्रदर्शन कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप चुनाव आयोग और भाजपा पर था। उनका कहना है कि दोनों की मिलीभगत से मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी की जा रही है।

​मंच से नेताओं ने एक आंकड़े पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने करीब 13 करोड़ लोगों के नाम बांग्लादेशी बताकर वोटर लिस्ट से काट दिए हैं। नेताओं ने चुटकी लेते हुए सवाल उठाया, जब बांग्लादेश की पूरी आबादी ही लगभग 11 करोड़ है, तो फिर 13 करोड़ लोग बांग्लादेशी कैसे हो गए?


जेएमएम का कहना है कि संथाल परगना, ईस्ट सिंहभूम और धनबाद-बोकारो जैसे कोयलांचल इलाकों में रहने वाले स्थानीय बांग्ला भाषी लोगों को जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

​आयोग के अंदर खींचतान का भी उठाया मुद्दा

​प्रदर्शनकारियों ने एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए दावा किया कि खुद चुनाव आयोग के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। नेताओं का कहना था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में वोटर लिस्ट के फॉर्म-6 और डेटा सुरक्षा को लेकर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्ति जताई है।

​मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांगा इस्तीफा

​गंभीर आरोप लगाते हुए जेएमएम कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग कर डाली। उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट का अधिकार सुरक्षित होना चाहिए और बिना किसी सही जांच-पड़ताल के किसी का भी नाम वोटर लिस्ट से हटाना पूरी तरह गलत है।
​प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का यह सिलसिला तुरंत नहीं रोका गया और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप लेगा।

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