रांची : झारखंड में ठंड ने दस्तक दे दी है। लोगों को इसका अहसास होने लगा है। तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शुरुआती ठंड खतरनाक हो सकती है। ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग के अनुसार, एक नवंबर से न्यूनतम तापमान में और गिरावट होने की संभावना है।
ऐसे में ठंड भी बढ़ेगी। इस दौरान खासकर बच्चे व बुजुर्गों को सबसे अधिक सावधान होने की जरूरत है। चूंकि, शुरुआती व अंतिम ठंड सबसे ज्यादा बच्चे व बुजुर्गों को ही प्रभावित करती है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि नवंबर में ठंड बढ़ती है और हवा के रुख में भी बदलाव होता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से यह प्रभावित होता है। उत्तर की हवा आने पर नवंबर से ठंड बढ़नी शुरू हो जाती है।
गढ़वा में सबसे अधिक ठंड
राज्य के लगभग सभी जिलों में न्यूनतम तापमान घटकर 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। बीते 24 घंटे की बात करें तो मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में मौसम शुष्क रहा। सबसे अधिक उच्चतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस डाल्टेनगंज जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस गढ़वा में दर्ज किया गया।
30 अक्टूबर को किस जिले में कितना रहा न्यूनतम तापमान
जिला : न्यूनतम तापमान (डिग्री सेल्सियस)
रांची : 16.2
जमशेदपुर : 19.2
डाल्टेनगंज : 16.5
बोकारो : 16.5
चाईबासा : 17.6
देवघर : 17.7
गिरीडीह : 17.6
गढ़वा : 14.9
रामगढ़ : 15.5
गोड्डा : 18.3
ठंड में इन बीमारियों का रहता है खतरा
– टॉन्सिल का बढ़ना : इस मौसम में टॉन्सिल बढ़ जाता है। दरअसल, टांसिल तब बढ़ता है जब गले के पीछे दो अंडाकार आकार के टिशू पैड्स में सूजन आ जाती है। इस सूजन की वजह से टॉन्सिल बढ़ जाते हैं।
– जोड़ों में दर्द : सर्दियों में जोड़ों के दर्द बढ़ जाता है। सर्दियों में वायुमंडलीय दबाव में गिरावट के साथ शरीर में ‘पेन रिसेप्टर्स’ अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। जिसकी वजह से टिशूज़ में सूजन आ जाती है और जोड़ों में दर्द होने लगता है।
– जुकाम और बुखार : सर्दी के मौसम में जुकाम और बुखार सबसे आम बीमारी है। बदलते मौसम या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से कम प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति व बच्चों पर सीधा असर पड़ता है। कमजोरी, नाक बंद, छींकना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, खांसी आदि इसका सामान्य लक्षण हैं।
– कान का इंफेक्शन : अत्यधिक ठंड और नमी से कान के इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है। तीव्र कान का संक्रमण सर्दी की एक आम समस्या है, जो रातों-रात हो सकती है।
– ब्रोंकाइटिस : छोटे बच्चों और शिशुओं में यह बीमारी अधिक देखा जाता है। इस दौरान फेफड़ों में संक्रमण (वायरल) हो जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है क्योंकि इसकी वजह से फेफड़ों के सबसे छोटे वायु मार्ग में बलगम बनने लगता है।
– स्वाइन फ्लू : नवंबर से जनवरी माह के बीच स्वाइन फ्लू के मरीज सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। स्वाइन इंफ्लूएंजा एक संक्रामक सांस की रोग है जो कि सामान्य रूप से केवल सूअरों को प्रभावित करती है।
– हार्ट अटैक : ठंड के मौसम में हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के मामले 10 से 15 प्रतिशत बढ़ जाते हैं। ऐसे में इससे संबंधित मरीजों को काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
– सोरायसिस : ठंड में सोरायसिस की समस्या भी बढ़ जाती है। इस बीमारी का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह सुनिश्चित है कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और आनुवांशिक कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉक्टर और वैज्ञानिक अब तक सोरायसिस के असल कारण तक नहीं पहुंच पाए हैं। फिर भी कुछ सामान्य कारण हैं जो सोरायसिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। अक्सर कहा जाता है कि यदि आपके परिवार में किसी को सोरायसिस की बीमारी है, तो आपको सोरायसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। पर वास्तव में इसके बिना भी किसी की त्वचा पर सोरायसिस विकसित हो सकता है।

