प्रतापगढ़: भारतीय वायुसेना के बहादुर अफसर रामकुमार तिवारी का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी मौत आगरा एयर बेस में पैरा-जंपिंग के दौरान हुई थी, जब उनका पैराशूट तकनीकी कारणों से नहीं खुल सका और वे सीधे जमीन पर गिर गए। इस दुखद घटना ने उनके परिवार, दोस्तों और उनके साथियों को गहरे सदमे में डाल दिया।
रामकुमार तिवारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बेलहा, प्रतापगढ़ लाया गया। उनके शव के साथ उनकी पत्नी प्रीति तिवारी और दो बच्चे यश (14) और कुश (10) भी गांव पहुंचे। जब उनका शव घर के आंगन में पहुंचा, तो पत्नी प्रीति तिवारी और उनके माता-पिता का दर्द साफ नजर आया। प्रीति तिवारी रोते हुए एम्बुलेंस से बाहर आईं और वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। उनकी मां उर्मिला तिवारी अपने बेटे के शव से लिपट गईं और पिता रमाशंकर तिवारी ने अपने बहादुर बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
हादसा:
यह दुखद हादसा 41 वर्षीय रामकुमार तिवारी के लिए 1 अप्रैल को तब हुआ जब वह आगरा एयर बेस पर जवानों को पैरा-जंपिंग की ट्रेनिंग दे रहे थे। करीब 10 बजे सुबह जब उन्होंने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया और कूदे, तो तकनीकी कारणों से उनका पैराशूट नहीं खुल सका। वह सीधे जमीन पर गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ ही वहां मौजूद अफसर और ट्रेनिंग ले रहे जवानों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने उनकी हालत गंभीर देखकर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
सैन्य सेवा का संक्षिप्त विवरण:
रामकुमार तिवारी 2002 में भारतीय वायुसेना में वारंट अफसर के रूप में भर्ती हुए थे। पठानकोट में अपनी पहली पोस्टिंग के बाद उन्हें 2009 में आगरा एयरफोर्स स्टेशन भेजा गया, जहां वह जवानों को आसमान से जंप करने की ट्रेनिंग देते थे। उनकी सेवाओं की सराहना की जाती थी, और वह अपने काम में बेहद समर्पित थे।
रामकुमार तिवारी अपनी पत्नी प्रीति और बच्चों के साथ आगरा में रहते थे। उनके परिवार में माता-पिता, एक भाई विनय तिवारी, जो आस्ट्रेलिया में एक निजी कंपनी में काम कर रहे हैं, और दूसरा भाई श्याम तिवारी, जो लखनऊ हाईकोर्ट में वकील हैं, शामिल हैं। रामकुमार तिवारी की असामयिक मृत्यु ने उनके परिवार और समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है, लेकिन उनकी बहादुरी और वायुसेना में उनकी निष्ठा हमेशा याद रखी जाएगी।

