- साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन ठग गिरफ्तार
नई दिल्ली : दिल्ली के साउथ वेस्ट जिला साइबर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले तीन धोखेबाजों को गिरफ्तार किया है। ठगों ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग नागरिक को डराया और उससे उसकी सारी बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट, और पत्नी के गहने बेचकर 25 लाख रुपये पेटीएम और आरटीजीएस के जरिए हड़प लिए।

स्मार्टफोन और बैंक दस्तावेज बरामद
पकड़े गए आरोपियों की पहचान रायपुर, छत्तीसगढ़ निवासी राहुल वर्मा , रायपुर, छत्तीसगढ़ निवासी शांतनु रिछोरिया और सहारनपुर, उत्तर प्रदेश निवासी अर्जुन सिंह के रूप में हुई है। इनके कब्जे से ठगी में उपयोग 3 स्मार्टफोन, 4 सिम कार्ड, 3 चेकबुक, और 7 अलग-अलग बैंकों की 4 पासबुक बरामद की गई हैं।
डीसीपी सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि पालम कॉलोनी, राज नगर निवासी महेंद्र जैन ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (एनसीआरपी) के माध्यम से शिकायत दर्ज की कि 21 मार्च को उन्हें व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को नासिक पुलिस की क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताया और दावा किया कि उनका आधार कार्ड दुरुपयोग कर केनरा बैंक में फर्जी डेबिट/क्रेडिट कार्ड बनाया गया है। कॉलर ने एक बड़े एयरलाइन मालिक द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग में इस कार्ड के उपयोग का आरोप लगाया और पुलिस कार्रवाई की धमकी दी। डर के मारे महेंद्र ने अपनी सारी बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट, और पत्नी के गहने बेचकर 25 लाख रुपये पेटीएम और आरटीजीएस के जरिए ठगों को ट्रांसफर कर दिए। 10 अप्रैल को उनकी लिखित शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन, साउथ वेस्ट में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक एसएचओ साइबर पुलिस के नेतृत्व में जांच शुरू की। टीम ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट्स, और मनी ट्रेल के विश्लेषण के जरिए आरोपियों का पता लगाया। जांच में पता चला कि आरोपी फर्जी व्हाट्सएप पहचान का उपयोग कर दिल्ली के होटलों से ठगी कर रहे थे और पूरे भारत से म्यूल खाताधारकों को दिल्ली बुलाकर उनके साथ सांठगांठ कर रहे थे। पहाड़गंज, दिल्ली में छापेमारी कर तीन आरोपियों राहुल वर्मा, शांतनु रिछोरिया, और अर्जुन सिंह को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से अपराध में उपयोग किए गए 3 स्मार्टफोन, 4 सिम कार्ड, 3 चेकबुक, और 7 अलग-अलग बैंकों की 4 पासबुक बरामद की गईं।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी राहुल वर्मा ने पहले अपना बैंक खाता ठगी के लिए उपलब्ध कराया था। बाद में मुनाफा देखकर वह इस गिरोह का हिस्सा बन गया और म्यूल खातों की आपूर्ति करने लगा। आरोपी दिल्ली में म्यूल खाताधारकों को लाकर उनके साथ काम करते थे और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते थे ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चकमा दे सकें। ठगी की रकम को इन खातों में ट्रांसफर किया जाता था। अब तक 7-8 म्यूल खातों का पता लगाया जा चुका है। अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

