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RAM NAVAMI 2025 : त्रेता युग में यहां आए थे भगवान राम! रामशिला पहाड़ पर पदचिह्न के दर्शन के लिए उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

by Rakesh Pandey
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गया : बिहार के गया जिले में स्थित रामशिला पहाड़ पर एक ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाला रामशिला मंदिर है, जो भगवान राम से गहरे रूप में जुड़ा हुआ है। इस मंदिर का नामकरण भी भगवान राम से जुड़ी कई कथाओं और मान्यताओं के आधार पर हुआ है। कहा जाता है कि त्रेता युग में भगवान राम और उनके परिवार ने यहां विश्राम किया था, और यही वह स्थल है जहां भगवान राम ने पितरों के लिए अनुष्ठान किया था।

रामशिला मंदिर में भगवान राम सपरिवार विराजमान

रामशिला मंदिर का संबंध भगवान राम से अत्यंत गहरा है। इस मंदिर में भगवान राम, माता सीता, उनके भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के अलावा माता लक्ष्मी और भरत की पत्नी मांडवी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर में भगवान राम का साथ उनकी पत्नी सीता और उनके भाइयों के रूप में परिवार के सभी सदस्य विराजमान हैं, जो दर्शकों को आस्था और भक्ति का अहसास कराते हैं। यह मान्यता है कि यहां दर्शन करने से पापों का नाश होता है और भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं।

रामशिला पर्वत पर चरण चिन्ह और हनुमान की विशाल प्रतिमा

रामशिला पहाड़ पर भगवान राम के साक्षात चरण चिन्ह भी विराजमान हैं, जो इस स्थल की पवित्रता और महत्व को और बढ़ाते हैं। कहा जाता है कि भगवान राम के चरण पादुका के ये चिन्ह त्रेता युग में यहां स्थित थे। इन चरण चिन्हों को देखने के लिए भक्तों को पहाड़ की चोटी तक चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें 374 सीढ़ियां पार करनी होती हैं। इसके अलावा, यहां भगवान राम और उनके भक्त हनुमान की विशाल प्रतिमाएं भी हैं, जो मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण को और भी अलौकिक बना देती हैं। विशेष रूप से रामनवमी के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, और मंदिर में आस्था का सैलाब देखा जाता है।

रामकुंड सरोवर का महत्व

रामशिला मंदिर के सामने स्थित रामकुंड सरोवर का भी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। माना जाता है कि जब भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान करने के लिए यहां आए थे, तो उन्होंने इस सरोवर में स्नान किया था और फिर पिंडदान किया था। यह सरोवर आज भी श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ वे स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने की उम्मीद करते हैं।

रामशिला मंदिर का इतिहास

रामशिला मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, और इस मंदिर का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में भी मिलता है। लक्ष्मण पांडे, जो मंदिर के पुजारी हैं, बताते हैं कि यह मंदिर अति पौराणिक काल से है और इसका जीर्णोद्धार टिकारी महाराज गोपाल शरण ने कराया था। मंदिर में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, मांडवी और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो इस स्थान को एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धेय बनाती हैं।

रामशिला मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था

रामशिला मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए यह स्थान अत्यंत विशेष है, क्योंकि यहाँ भगवान राम के चरणों का दर्शन करने से उनके जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं और उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं। रामनवमी जैसे पर्वों पर यहां भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ता है, और मंदिर का वातावरण भक्ति और आस्था से भर जाता है। इसके अलावा, रामशिला मंदिर में स्थित हनुमान की विशाल प्रतिमा भी भक्तों को अपने शक्ति और भक्ति के दर्शन कराती है।

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