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गिरिडीह में पंचायत सेवक आत्महत्या मामला: डुमरी बीडीओ पर FIR के बाद प्रशासनिक सेवा संघ में नाराजगी

संघ ने पंचायत सेवक की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

by Reeta Rai Sagar
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गिरिडीह। जिले में पंचायत सेवक (सचिव) की मौत के बाद डुमरी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) समेत चार लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। FIR दर्ज होने के बाद झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है। इसको लेकर डुमरी प्रखंड कार्यालय में एक आपात बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त स्मिता कुमारी ने की। बैठक में पंचायत सेवक की आत्महत्या को लेकर बिंदुवार चर्चा की गई।

बिना अनुमति एफआईआर पर जताई आपत्ति
बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशों की अवहेलना करते हुए बिना प्रशासी विभाग की अनुमति के एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्यप्रणाली न केवल नियमविरुद्ध है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है। इस पर निर्णय लिया गया कि थाना प्रभारी के खिलाफ उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा और उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

केंद्रीय समिति को भेजा जाएगा प्रस्ताव
बैठक में यह भी तय हुआ कि राजस्व विभाग के निर्देशों के अनुपालन की मांग को लेकर जिला इकाई केंद्रीय समिति को प्रस्ताव भेजेगी। साथ ही, मुख्यमंत्री को एक प्रतिवेदन सौंपने के साथ इसकी प्रतिलिपि सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिला उपायुक्तों को भी भेजी जाएगी।

यह अनुरोध किया जाएगा कि सभी प्रशासी विभागों, विशेषकर पुलिस इकाइयों को संबंधित निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा जाए।

विकास कार्यों पर असर की आशंका
संघ ने चिंता व्यक्त की कि अगर किसी भी पर्यवेक्षण या अनुश्रवण की बात को प्रताड़ना माना जाएगा, तो इससे प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर असर पड़ेगा और समीक्षा बैठकें भी प्रभावित होंगी। इसका सीधा प्रभाव विकास योजनाओं की गति पर पड़ना तय है।

पंचायत सेवक के निधन पर शोक, मनोस्थिति को बताया अस्थिर
संघ ने पंचायत सेवक की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही, यह भी अवगत कराया कि संबंधित पंचायत सेवक पूर्व में बगोदर प्रखंड में पदस्थापित रहते हुए भी उच्चाधिकारियों के निर्देश की अवहेलना के आरोप में निलंबित हो चुके थे।

पीरटांड़ प्रखंड में कार्यरत रहते हुए उन्होंने आत्महत्या या आत्मदाह की धमकी दी थी, जिस पर बीडीओ ने तत्काल उपायुक्त को सूचित किया था। संघ के अनुसार, मृतक की मानसिक स्थिति कमजोर थी और उनका चित्त अस्थिर रहता था।

इस आधार पर डुमरी बीडीओ के विरुद्ध प्रताड़ना के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया गया है।

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