साहिबगंज : मालदा रेल मंडल में सोमवार को रेलवे गार्डों की नाराजगी के चलते मालगाड़ियों का परिचालन करीब 7 घंटे तक ठप रहा। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मालगाड़ियों के पहिए जाम रहे, जिससे रेलवे को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, रेलवे ने हाल ही में एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत मालगाड़ियों के गार्डों को हैंड ब्रेक लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह काम पहले पोर्टर किया करते थे। इस आदेश के खिलाफ गार्डों ने मोर्चा खोल दिया और सोमवार को सामूहिक रूप से ड्यूटी करने से इनकार कर दिया। गार्डों ने रेलवे अस्पताल पहुंचकर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया और छुट्टी की अर्जी लगा दी। उनके अनुसार, यह नई जिम्मेदारी उनके काम के बोझ को बढ़ा रही है और इससे उनके मानसिक तनाव में भी वृद्धि हो रही है।
गार्डों की मुख्य आपत्तियां :
– हैंड ब्रेक लगाना अब गार्डों की जिम्मेदारी कर दी गई है, जबकि पहले यह पोर्टर का काम था।
– लंबे समय तक ऑन ड्यूटी रहना (12-14 घंटे) और 72 घंटे तक मुख्यालय से बाहर रहने की नौबत।
– सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा प्रतिकूल असर।
– मानसिक एकाग्रता में कमी और कार्यकुशलता पर प्रभाव।
गार्डों का कहना है कि रेल प्रशासन जानबूझकर गार्डों के जॉब प्रोफाइल के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और उन्हें Group D के अंतर्गत लाने की योजना बनाई जा रही है। रेलवे के चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि कई गार्ड मानसिक परेशानी की बात कर रहे हैं, जिन्हें उचित इलाज और परामर्श के लिए रेफर किया गया है। हालांकि, रेलवे के उच्चाधिकारियों के आश्वासन के बाद गार्ड शाम 5 बजे से फिर ड्यूटी पर लौट आए और मालगाड़ियों का परिचालन धीरे-धीरे सामान्य हुआ।
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