सेंट्रल डेस्क : कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े विवाद में एक नया मोड़ आया है, जब चार कथित हत्यारों को जमानत मिल गई। यह केस न केवल भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव का कारण बना, बल्कि कनाडा पुलिस को भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। कनाडा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आरोपियों को जमानत देने का फैसला किया, जिसके बाद कनाडा की पुलिस को बड़ा झटका लगा है।
कनाडा पुलिस की कमजोरी और जमानत
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा पुलिस का प्रदर्शन कई सवालों के घेरे में आ गया है। जहां कनाडा सरकार ने भारत पर इस हत्या से जुड़े आरोप लगाए थे, वहीं पुलिस कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश करने में असमर्थ रही। निचली अदालत में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की तारीख 11 फरवरी तय की। इसके साथ ही, कोर्ट ने आरोपियों को स्टे ऑफ प्रोसिडिंग्स के तहत जमानत पर रिहा कर दिया।
चार आरोपियों की पहचान
कनाडा पुलिस ने 2024 के मई महीने में चार भारतीयों को गिरफ्तार किया था, जो हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोपी थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में करण बराड़ (22), कमलप्रीत सिंह (22), करणप्रीत सिंह (28) और अमरदीप सिंह (22) शामिल थे। इन चारों पर फर्स्ट डिग्री हत्या और हत्या की साजिश रचने के आरोप थे।
इन्हें एडमंटन में गिरफ्तार किया गया था और इस हत्याकांड में इनका कथित रूप से महत्वपूर्ण रोल था। पुलिस ने आरोपियों पर यह भी आरोप लगाया कि इन चारों ने निज्जर की हत्या की योजना बनाई थी और इसे अंजाम दिया। हालांकि, कनाडा के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन आरोपियों को जमानत मिल गई और वे अब पुलिस की हिरासत से बाहर हैं।
हरदीप सिंह निज्जर मर्डर केस
यह हत्या 18 जून 2023 को कनाडा के सरे शहर के एक गुरुद्वारे के बाहर हुई थी, जहां हरदीप सिंह निज्जर को गोलियों से भून दिया गया था। निज्जर, जो कि एक खालिस्तानी समर्थक और भारत में वांछित आतंकवादी था, भारत सरकार के लिए एक संवेदनशील मामला था। निज्जर के खिलाफ भारत में कई मामलों में आरोप थे, जिसमें हत्या और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। 1997 में वह कनाडा भाग गया था और तब से कनाडा की सरकार ने निज्जर के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी।
भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव
निज्जर की हत्या के बाद से भारत और कनाडा के रिश्तों में और भी अधिक तनाव आ गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर यह आरोप लगाया था कि भारत सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल थे। इस बयान के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर विवाद बढ़ गया। कनाडा ने 2024 के अक्टूबर में भारतीय राजनयिकों को इस मामले में ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ बताया और इस मामले में भारत की भूमिका पर सवाल उठाए।
भारत सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री का यह बयान बिना किसी ठोस प्रमाण के था और इसे गलत तरीके से पेश किया गया। भारत ने इस पूरे मामले को कनाडा की आंतरिक राजनीति का हिस्सा बताया और साफ किया कि भारतीय एजेंसियों का इस हत्याकांड से कोई संबंध नहीं है।

