
हजारीबाग : शहर के ऐतिहासिक ओकनी तालाब के संरक्षण और कायाकल्प से जुड़े मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने हजारीबाग जिला प्रशासन को अंतिम अवसर दिया है। जय गोपाल राय बनाम झारखंड राज्य मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पूर्वी क्षेत्र पीठ, कोलकाता ने प्रशासन को दो महीने के भीतर शपथ पत्र के साथ विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई के दौरान हजारीबाग के जिला मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत रूप से अधिकरण के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है।
ओकनी तालाब की पर्यावरणीय स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर हुई सुनवाई के दौरान अधिकरण ने तालाब में आसपास के रिहायशी क्षेत्रों से नालियों का गंदा पानी पहुंचने और इसके आसपास कचरा जमा होने के मुद्दे को गंभीरता से लिया। अधिकरण के निर्देशों के मुताबिक प्रशासन को तालाब के संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिति में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा।
ओकनी तालाब में गंदा पानी पहुंचने पर एनजीटी की नाराजगी
हजारीबाग के ओकनी तालाब की मौजूदा स्थिति को लेकर सुनवाई के दौरान नालियों के माध्यम से गंदा पानी तालाब में जाने का मुद्दा सामने आया। तालाब के आसपास कचरा जमा होने को लेकर भी चिंता जताई गई। पर्यावरणीय दृष्टि से तालाब की स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने और उसके संरक्षण की दिशा में ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई गई है।
तालाब के संरक्षण के लिए पहले भी जिला प्रशासन को कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करने का निर्देश दिया गया था। अधिकरण के आदेश के अनुसार, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना था कि संरक्षण और कायाकल्प से जुड़े कार्य तय समयसीमा के भीतर आगे बढ़ें।
3 जुलाई की समय सीमा के बाद भी नहीं दाखिल हुई रिपोर्ट
ओकनी तालाब के संरक्षण और कायाकल्प के लिए तैयार कार्ययोजना के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए पहले 3 जुलाई 2026 तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद अधिकरण के समक्ष अपेक्षित अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा सकी। रिपोर्ट दाखिल नहीं होने के बाद मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जिला प्रशासन को अब अंतिम अवसर दिया है। प्रशासन को दो महीने के भीतर शपथ पत्र के साथ विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसमें पहले जारी किए गए निर्देशों पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा।
हजारीबाग डीसी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी का आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मामले में जवाबदेही तय करने के लिए हजारीबाग के जिला मजिस्ट्रेट को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जिला मजिस्ट्रेट को ओकनी तालाब से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज और रिकॉर्ड के साथ अधिकरण के समक्ष पेश होना होगा। व्यक्तिगत उपस्थिति भौतिक रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो सकती है। इसके साथ ही जिला प्रशासन को अनुपालन रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ दाखिल करनी होगी। रिपोर्ट के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि तालाब के संरक्षण के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई और पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना अनुपालन हुआ है।
नालियों का पानी रोकने और कचरा हटाने पर देना होगा ब्योरा
मामले में अब जिला प्रशासन को केवल कार्ययोजना तैयार करने के बजाय उसके क्रियान्वयन से जुड़े दस्तावेज अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। ओकनी तालाब में नालियों का गंदा पानी जाने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, तालाब के आसपास जमा कचरे को हटाने के लिए क्या कार्रवाई हुई और तालाब के पर्यावरणीय संरक्षण के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए, इसकी जानकारी अनुपालन रिपोर्ट में देनी होगी।
अधिकरण की ओर से दिए गए निर्देश के बाद ओकनी तालाब के संरक्षण से जुड़े कार्यों की प्रगति पर अब जिला प्रशासन को विस्तृत जवाब देना होगा। रिपोर्ट में पूर्व आदेशों के अनुपालन की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।
20 नवंबर को होगी ओकनी तालाब मामले की अगली सुनवाई
ओकनी तालाब से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस तारीख तक जिला प्रशासन को शपथ पत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इसके अलावा हजारीबाग के जिला मजिस्ट्रेट को प्रासंगिक रिकॉर्ड के साथ अधिकरण के समक्ष उपस्थित होना होगा।

