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Jamshedpur News: मनरेगा तकनीकी सहायक भर्ती में गड़बड़ी आई सामने, जानें कहां कहां की गई अनियमितता

by Mujtaba Haider Rizvi
Jamshedpur MGNREGA technical assistant recruitment irregularities
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Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले में मनरेगा के तहत तकनीकी सहायक (कनीय अभियंता समकक्ष) पदों पर हुई संविदा नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त सह जिला कार्यक्रम समन्वयक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

यह विवाद विज्ञापन संख्या 01/2023-24 से जुड़ा है, जिसके तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया।

योग्यता के मानक पर खरे नहीं उतरते कई उम्मीदवार

अभ्यर्थियों के अनुसार, विज्ञापन में कंप्यूटर योग्यता जैसे पीजीडीसीए या मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य बताया गया था, लेकिन चयनित कुछ उम्मीदवार इस शर्त पर खरे नहीं उतरते। आरोप है कि कई अभ्यर्थियों के पीजीडीसीए प्रमाणपत्र उनकी स्नातक डिग्री से पहले के वर्ष के हैं, जो संदेह पैदा करता है।

एक अभ्यर्थी के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों पर भी सवाल

इसके अलावा अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गई और सामान्य व ईडब्ल्यूएस वर्ग में चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे उम्मीदवारों में असंतोष बढ़ा है। शिकायत में एक विशेष मामले का जिक्र करते हुए आवेदन संख्या 623228338149 वाले अभ्यर्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए हैं। विवरण के अनुसार, उक्त अभ्यर्थी ने डिप्लोमा (सिविल) 2013, बीटेक (सिविल) 2017 और पीजीडीसीए 2015 में किया है, जिसे अभ्यर्थियों ने संदिग्ध बताया है।

साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ चयनित उम्मीदवार पहले से अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत थे, बावजूद इसके उन्होंने शपथ पत्र में यह जानकारी छिपाकर आवेदन किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह शर्तों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में नियुक्ति स्वतः रद्द होनी चाहिए।शिकायत में जिन अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, उनमें शीतल महापात्र, अनुपम साहू और अभिजीत बेरा शामिल हैं। इनके शैक्षणिक दस्तावेज और कार्यस्थल की भी जांच की मांग की गई है।

आवेदनकर्ता प्रियंका डबलिन और सिद्धार्थ ग्लुश ने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर नई मेधा सूची जारी की जाए, ताकि केवल योग्य उम्मीदवारों को ही नियुक्ति मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।

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