Jamshedpur (Jharkhand) : झारखंड के जमशेदपुर में निजी स्कूलों की मनमानी अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अगले महीने होने वाली जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक में निजी स्कूलों के लिए कई कड़े प्रस्ताव रखे जाएंगे। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए इन प्रस्तावों को समिति की मंजूरी मिलते ही सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर स्कूलों को घेरने की तैयारी है। इनमें सबसे अहम है लगातार बढ़ती फीस पर नियंत्रण लगाना, स्कूलों द्वारा हर साल सिलेबस में किए जाने वाले बदलावों को रोकना, बच्चों से वसूले जाने वाले मेंटेनेंस शुल्क के प्रति स्कूलों को जवाबदेह बनाना और स्कूल परिसर के व्यावसायिक इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाना।
तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, अब स्कूलों को हर साल शिक्षा विभाग को यह बताना होगा कि उन्होंने बच्चों से मेंटेनेंस के नाम पर कितना शुल्क वसूला और उस राशि का उपयोग कहां किया गया। इसके साथ ही, जो स्कूल अपने परिसर का व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं, उन्हें इसे तुरंत बंद करना होगा। शिक्षा विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ स्कूलों में बैंक शाखाएं चल रही हैं, तो कुछ में एटीएम मशीनें लगी हैं और कुछ बाहरी लोगों के लिए कैंटीन चला रहे हैं। इन सभी व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की तैयारी है।
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस प्रस्ताव को जिला स्तरीय कमेटी से अनुमोदित कराने के लिए जल्द ही शिक्षा मंत्री के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे सभी स्कूलों को भेजकर इन निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाएगा। शिक्षा विभाग यह भी स्पष्ट कर चुका है कि जो भी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के दायरे में ही होंगे।
प्रस्तावित मुख्य नियम
सिलेबस में बदलाव पर रोक: नए प्रस्ताव के अनुसार, निजी स्कूल एक बार अगर अपने सिलेबस में कोई बदलाव करते हैं, तो वे अगले तीन साल तक उसमें कोई और बदलाव नहीं कर पाएंगे। एक बार जो किताबें लागू की जाएंगी, उन्हें स्कूल को कम से कम तीन साल तक अपने सिलेबस में रखना होगा। जबकि अभी तक शहर के ज्यादातर स्कूल हर साल सिलेबस में कुछ न कुछ बदलाव करके किताबें बदल देते थे, जिससे अभिभावकों को आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता था।
- लगातार फीस वृद्धि पर नियंत्रण: लगातार फीस में होने वाली बढ़ोतरी पर भी लगाम लगाने की तैयारी है। इसके तहत अब स्कूल मनमाने ढंग से हर साल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। उन्हें कम से कम एक साल का अंतराल रखना होगा। इसके अलावा, यदि वे 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाते हैं, तो इसके लिए उन्हें जिला स्तरीय फीस निर्धारण कमेटी से स्वीकृति लेनी होगी।
- परिसर के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध: सभी निजी स्कूलों को यह लिखित घोषणा देनी होगी कि वे अपने स्कूल परिसर का उपयोग किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं कर रहे हैं। जो स्कूल ऐसा कर रहे हैं, उन्हें तत्काल इन गतिविधियों को बंद करना होगा।
- मेंटेनेंस शुल्क का हिसाब: निजी स्कूल बच्चों से जो मेंटेनेंस शुल्क लेते हैं, उसकी पूरी जानकारी उन्हें हर साल शिक्षा विभाग को देनी होगी। इसके साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि इस शुल्क का उपयोग कहां किया जा रहा है। यदि कोई स्कूल मेंटेनेंस शुल्क से ऑडिटोरियम बनाता है, तो वह उसे किसी अन्य संस्थान को पैसे लेकर कार्यक्रम के लिए नहीं दे सकेगा।
स्कूलों से जानकारी मिलने के बाद विभाग कर रहा प्रस्ताव तैयार
गौरतलब है कि इसी महीने शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर उनसे पिछले तीन साल की फीस, ऑडिट रिपोर्ट और किताबों की सूची की जानकारी मांगी थी। जिसे स्कूलों ने पिछले सप्ताह विभाग को उपलब्ध करा दिया था। इसमें अधिकतर निजी स्कूलों ने यह स्वीकार किया था कि वे हर साल अपनी किताबों में बदलाव करते हैं। स्कूलों से मिली इस जानकारी के बाद ही शिक्षा विभाग ने नए प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग के इन प्रयासों से जमशेदपुर के अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी से कितनी राहत मिलती है।

