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Jharkhand Assembly News : थैलेसिमिया पर सवाल, सत्ता पक्ष में भूचाल : कांग्रेस विधायक प्रदीप और मंत्री इरफान भिड़े, स्पीकर को देना पड़ा नियमन

Jharkhand Assembly News : दोनों के बीच बहस इतनी गरमा गई कि स्पीकर रबींद्र नाथ महतो को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

by Anand Kumar
Congress MLA Pradeep Yadav and Health minister Irfan Ansari clash over thalesemia question
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Ranchi : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन उस समय नाटकीय हो गया जब सत्ताधारी महागठबंधन के दो प्रमुख चेहरे, कांग्रेस विधायक दल नेता प्रदीप यादव और कांग्रेस कोटे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, थैलेसिमिया, सिकल सेल एनीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों के इलाज को लेकर एक-दूसरे पर व्यक्तिगत हमले करने लगे। ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान शुरू हुई बहस इतनी गरमा गई कि स्पीकर रबींद्र नाथ महतो को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा और अंत में दोनों नेताओं को चैंबर में बैठकर बात करने की सलाह देनी पड़ी।

प्रदीप यादव ने सबसे पहले आंकड़े पेश किए। कहा – राज्य में करीब 11 हजार बच्चे इन तीनों गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित हैं। इन्हें हर महीने एक से दो बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन चाहिए। लेकिन न तो राज्य में ब्लड सेपरेशन यूनिट की पर्याप्त व्यवस्था है, न ही नि:शुल्क इलाज की ठोस नीति। परिजन रांची से रायपुर, रायपुर से दिल्ली भटकते रहते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए लड़कों को 15 लाख और लड़कियों को 18 लाख देती है। कर्नाटक 20 लाख, बिहार-ओडिशा 15 लाख तक देते हैं। झारखंड में क्या है?

प्रदीप यादव ने चार सवाल दागे, मरीजों का सही सर्वे है? नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था क्या है? ब्लड डोनर को चिन्हित करने का कोई प्लान है? केंद्र से मिलने वाली 10 लाख रुपये की मदद का क्या हुआ?

जवाब देने के लिए जैसे ही इरफान अंसारी खड़े हुए, उन्होंने पहले पुराना हिसाब चुकता किया। “कल माननीय सदस्य ने हंसडीहा अस्पताल में 25 करोड़ के उपकरण चोरी का मामला उठाया था। जांच में सिर्फ 60 लाख का मामला निकला। सदन को गुमराह करने की कोशिश की गई। मैं प्रोसिडिंग से उस बयान को हटाने की मांग करता हूं।” इसके बाद उन्होंने थैलेसिमिया पर जवाब शुरू किया तो तीखापन और बढ़ गया। इरफान बोले -11 हजार का आंकड़ा बहुत कम है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा के पास सटीक डाटा है। हम एक महीने में पूरा डाटा जुटा लेंगे।

चाईबासा की घटना से हम सब सचेत हैं। वहां गलत ब्लड चढ़ने से पांच बच्चे एसआईवी पॉजिटिव हो गए। हमने पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये दिए। एक बच्चे को एक साल में 179 बार ब्लड चढ़ाया गया, जांच की तो पता चला 60 लोग डोनर थे। उस घटना के बाद कोई ब्लड देने को तैयार नहीं। मुख्यमंत्री समेत हम सबने डोनेट किया, 10 हजार यूनिट जमा किए।
फिर शुरू हुई तीखी नोकझोंक।

प्रदीप यादव – “सरकारी अस्पतालों में भी ब्लड के पैसे लिए जाते हैं।”
इरफान अंसारी – “कौन ले रहा है पैसा? सदन को गुमराह न करें।”
प्रदीप यादव – “आप हर बार प्रश्न आधा छुड़वा देते हैं।”
इरफान अंसारी – “हर चीज में नेतागिरी नहीं चलेगी… घटना जिस तरह उठाते हैं, हमारे मरीज मर जाते हैं।”

स्पीकर बीच में – “रुकिए… आप जो चाहेंगे वैसा जवाब मंत्री नहीं देंगे… प्रदीप जी, माननीय सदस्य बोलिए… आप और मंत्री चैंबर में जाकर बात कर लीजिए।”सदन में हँसी और शोर का माहौल बन गया। स्पीकर ने अंततः सरकार को निर्देश दिया – एक महीने में सभी मरीजों का पूरा डाटा जुटाएं, सभी सरकारी ब्लड बैंक में सेपरेशन यूनिट लगाएं, सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करें।

सत्र के दौरान सत्ता पक्ष की यह आपसी कलह महज थैलेसिमिया तक सीमित नहीं रही। यह गठबंधन धर्म की दरार को एक बार फिर सबके सामने ले आई। इस बीच विपक्षी बेंचों से लगातार टिप्पणियां आती रहीं।

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