Anand Mishra @ Jamshedpur : इस बार के विधानसभा चुनाव में कोई बड़ा मुद्दा नहीं चला, न भ्रष्टाचार ना डेमोग्राफी चेंज का। न हेमंत सोरेन के विरोध में कोई लहर थी, ना भाजपा के पक्ष में कोई हवा थी। इस बार किसी चीज़ ने परिणामों का रुख बदला, तो वह थी हेमंत सरकार की मंईंयां सम्मान योजना। भाजपा ने गोगो दीदी योजना की घोषणा की थी, लेकिन हेमंत सरकार ने चुनाव की अधिसूचना से पहले ही मंईंयां सम्मान योजना को लागू कर दिया था। इसका असर खासकर महिला मतदाताओं पर पड़ा और उनकी ओर झुकाव बना। वहीं, भाजपा की डेमोग्राफी चेंज की रणनीति भी राज्य में प्रभावी साबित नहीं हुई, खासकर संताल परगना में, जहां भाजपा को पूरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। रही बात आजसू पार्टी की तो 10 सीटों की दावेदारी करनेवाले सुदेश महतो को खुद हार का मुंह देखना पड़ा। नौ सीटों पर शिकस्त मिली। महतो वोटरों पर सुदेश महतो प्रभाव नजर नहीं आया। बताया जाता है कि जेएलकेएम के जयराम महतो की कैंची की धार ने महतो वोटरों को प्रभावित किया है।
झारखंड में भाजपा की बड़ी हार, झामुमो की शानदार जीत
झारखंड की 28 रिजर्व सीटों पर भाजपा को करारी हार मिली, जबकि झामुमो ने शानदार सफलता हासिल की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हेमंत सोरेन और कल्पना ने मिलकर जो चुनावी रणनीति बनाई, उसने विरोधी दलों को मात दी। इस बार भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती आजसू पार्टी के नेतृत्व वाली सीट बंटवारे की समस्या बनी। सुप्रीमो सुदेश महतो ने भाजपा से कड़े संघर्ष के बाद सीटों का विभाजन किया, जिससे एनडीए के उम्मीदवारों को नुकसान हुआ।
आजसू पार्टी ने भाजपा की नैया डुबोई
आजसू पार्टी, जो एनडीए की सहयोगी रही है, ने भाजपा की नैया डुबोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महतो वोटरों पर सुदेश महतो का जादू नहीं चल सका। इसके अलावा चुनाव से पहले सीट बंटवारे के दौरान सुदेश महतो ने भाजपा नेताओं को कठिनाइयों में डाल दिया था। आजसू ने 10 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल एक सीट पर जीत हासिल कर पाई। मांडू सीट पर निर्मल महतो ने महज 231 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं, सुदेश महतो खुद सिल्ली सीट से हार गए, जहां झामुमो के अमित महतो ने उन्हें परास्त किया। अब भाजपा आजसू के साथ अपने रिश्तों पर पुनर्विचार कर सकती है।
जेएलकेएम ने झामुमो और भाजपा को दिया बड़ा झटका
चुनाव में झारखंड के एक और बड़े उलटफेर में जेएलकेएम पार्टी ने अहम भूमिका निभाई। डुमरी सीट से जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने झारखंड सरकार के मंत्री रहे स्व. जगरनाथ महतो की पत्नी बेबी देवी को हराकर सभी को चौंका दिया। यह सीट झामुमो का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन जयराम महतो ने 9,724 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। डुमरी में उनकी जीत ने भाजपा के उम्मीदवार यशोदा देवी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया।
जेएलकेएम का प्रभाव बढ़ा, भाजपा पर पड़ा भारी
इसके अलावा, बेरमो और रामगढ़ जैसी सीटों पर भी जेएलकेएम के उम्मीदवारों ने भाजपा के उम्मीदवारों को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। बेरमो सीट पर जेएलकेएम के जयराम कुमार महतो ने भाजपा के रवींद्र कुमार पांडेय को हराया, जबकि रामगढ़ सीट पर पनेश्वर कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42,856 वोट हासिल किए। सुदेश महतो की खुद की सीट सिल्ली में भी जेएलकेएम के देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी धार दिखाई और 32,485 वोट प्राप्त किए।
जुगसलाई सीट पर जेएलकेएम का प्रभाव
झारखंड के जमशेदपुर की जुगसलाई सीट पर भी जेएलकेएम के उम्मीदवार विनोद स्वांसी ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी और 10 राउंड तक दूसरे स्थान पर बने रहे। इस चुनावी परिणाम ने साफ कर दिया कि झारखंड में भाजपा के लिए अब हालात बदलने लगे हैं, और जेएलकेएम का बढ़ता प्रभाव पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है।
हेमंत सरकार की रणनीति और राजनीतिक बदलाव
विशेषज्ञों की मानें, तो झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों में हेमंत सोरेन की रणनीति ने भाजपा और एनडीए के घटक दलों को झटका दिया। मंईंयां सम्मान योजना और झामुमो की मजबूत चुनावी रणनीति ने राज्य की राजनीति में बदलाव की दिशा निर्धारित की है। जहां भाजपा को अपने पुराने सहयोगी आजसू और जेएलकेएम से चुनौती मिली, वहीं झामुमो ने राज्य में अपनी पकड़ और मजबूत की है।

