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Ranchi University : श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदला तो सरकार की ईंट से ईंट बजाएगा बंगाली समुदाय

बांग्लाभाषी संगठनों का राज्य सम्मेलन संपन्न, झारखंड में बांग्ला भाषा और संस्कृति के अस्तित्व पर मंडराते संकट पर मंथन

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति द्वारा आयोजित राज्य सम्मेलन का आयोजन रविवार को जमशेदपुर के भालूबासा स्थित होटल मिस्टी इन में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए बांग्लाभाषी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का केंद्र बिंदु राज्य में बांग्ला भाषा और बांग्ला भाषियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे और सरकार की नीतियों के प्रति गहरी चिंता था।

सम्मेलन में यह आरोप लगाया गया कि झारखंड में बांग्ला भाषा को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। समिति के प्रदेश संयुक्त सचिव काबू दत्ता ने बताया कि झारखंड का इतिहास, भूगोल और जनसंख्या संरचना बांग्ला भाषा बहुल है। राज्य के 24 में से 16 जिलों में बांग्ला संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग होती है, फिर भी सरकार की नीतियों से बांग्ला भाषा और संस्कृति का अस्तित्व संकट में है।

सम्मेलन में बताया गया कि झारखंड गठन के बाद बांग्ला माध्यम के स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति बंद कर दी गई, बांग्ला शिक्षकों की नियुक्ति रोक दी गई और धीरे-धीरे स्कूलों को बंद कर दिया गया। इस वजह से बांग्लाभाषी छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई और ड्रॉपआउट दर बढ़ी।

अब शिक्षा मंत्री छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षक और किताबें देने की बात कह रहे हैं, जिसे बांग्लाभाषी समाज ने गैरजिम्मेदाराना करार दिया है।इसके साथ ही सम्मेलन में सरकार द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम को विश्वविद्यालय से हटाने के निर्णय की भी तीव्र आलोचना की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद और स्वतंत्र भारत के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य थे। उनके योगदान की अनदेखी कर उनके नाम को हटाना पूरे बांग्ला समाज का अपमान है।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव पारित किया गया।

* झारखंड में बांग्ला को द्वितीय राजभाषा के रूप में व्यावहारिक रूप से लागू किया जाए।

* केजी से पीजी तक बांग्ला में पठन-पाठन सुनिश्चित हो।

* बांग्ला पाठ्यपुस्तकों की अविलंब आपूर्ति की जाए और पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग लिया जाए।

* बांग्ला शिक्षकों की नियुक्ति पूर्व की भांति की जाए।

* सभी विद्यालयों में मातृभाषा बांग्ला की पढ़ाई अनिवार्य की जाए।

* झारखंड में बांग्ला अकादमी का गठन हो।

* राज्य अल्पसंख्यक आयोग में बांग्ला भाषियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

* बांग्ला महापुरुषों के स्मृति स्थलों का निर्माण हो।

* धनबाद में ए के राय की स्मृति में स्मारक बने।

सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि 19 मई से राज्य के 150 प्रखंडों के 25,000 गांवों में बांग्ला जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की नीतियों के विरोध में जनमत तैयार किया जा सके।

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