रांची : झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में टेंडर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया कि झारखंड के भवन निर्माण विभाग ने सिमडेगा में कोल्ड स्टोरेज निर्माण के लिए 5 अप्रैल को टेंडर जारी किया और महज दो दिन बाद 7 अप्रैल को निविदा खोलने की तिथि तय कर दी। उन्होंने यह सवाल उठाया कि रामनवमी के दिन और रविवार की छुट्टी के बावजूद केवल एक दिन में सभी दस्तावेज़ तैयार करना और निविदा प्रक्रिया में शामिल होना लगभग असंभव था। इसके परिणामस्वरूप यह पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है, और ऐसा प्रतीत होता है कि टेंडर पहले से ही एक खास वर्ग या ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तय किया गया था।
टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता की अपील
बाबूलाल मरांडी ने सिमडेगा के डीसी से इस टेंडर को तत्काल निरस्त करने की मांग की और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सभी इच्छुक प्रतिभागियों को समान अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रियाओं से भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को बढ़ावा मिलता है, जो राज्य के विकास के लिए हानिकारक है।
आदिवासी समाज के अस्तित्व को लेकर आरोप
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज के अस्तित्व से समझौता करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति के तहत संथाल परगना में घुसपैठियों को नागरिकता दे दी है, जिससे वहां की परंपरा, संस्कृति और पहचान खतरे में पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रामनवमी जुलूस में असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पन्न की गई समस्या को वोट बैंक की राजनीति के तहत संरक्षण दिया जा रहा है।
जेएसएससी पेपर लीक मामले में CBI जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) के पेपर लीक मामले को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो स्क्रीनशॉट सबूत के तौर पर प्रस्तुत किए गए थे, उन्हें फॉरेंसिक जांच में सही पाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पेपर लीक मामले की लीपापोती करने का प्रयास किया था, और पहले अधिकारियों ने बिना जांच के छात्रों को ही दोषी ठहरा दिया था। मरांडी ने कहा कि अब फॉरेंसिक जांच ने सच्चाई सामने ला दी है, और इस मामले में भ्रष्ट अधिकारियों और हेमंत सोरेन के करीबी दोस्तों के तार जुड़े हुए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से इस संगीन मामले में सीबीआई जांच का आदेश देने की मांग की है।

