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Jharkhand Education News: नियुक्ति के दो साल बाद भी सेवा अनुमोदन योगदान के लिए भटक रहे अल्पसंख्यक विद्यालयों के 50 से अधिक शिक्षक

डीसी ऑफिस में शिक्षकों ने सौंपा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन

by Vivek Sharma
झारखंड में अल्पसंख्यक विद्यालयों के 50 से अधिक शिक्षक सेवा अनुमोदन की कमी से वेतन और योगदान के लिए भटक रहे हैं। शैक्षिक व्यवस्था पर असर।
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जमशेदपुर : जिले के अल्पसंख्यक विद्यालयों में करीब दो वर्ष पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों का सेवा अनुमोदन अब तक नहीं हो सका है। इसके कारण 50 से अधिक नवनियुक्त शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में योगदान नहीं दे पा रहे हैं। स्थिति यह है कि एक ओर जहां इन विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर पठन-पाठन कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

सेवा अनुमोदन नहीं मिलने के कारण नवनियुक्त शिक्षकों को वेतन का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। इससे शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है और उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। बताया जाता है कि नियुक्ति के समय प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल उठे थे, हालांकि बाद में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं।

मिली जानकारी के अनुसार अल्पसंख्यक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। इसके लिए विधिवत विज्ञापन जारी किया जाता है और साक्षात्कार के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विद्यालय चयनित शिक्षकों की सूची जिला शिक्षा विभाग को भेजते हैं, जिसे आगे माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को अनुमोदन के लिए भेजा जाता है।

निदेशालय स्तर पर अनुमोदन मिलने के बाद ही नियुक्ति मान्य होती है और शिक्षकों का वेतन सरकार द्वारा भुगतान किया जाता है। लेकिन पिछले लगभग दो वर्षों से निदेशालय में अनुमोदन को लेकर कोई बैठक नहीं हो सकी है। इसी कारण नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद शिक्षक न तो विद्यालय में योगदान दे पा रहे हैं और न ही उन्हें वेतन मिल पा रहा है।

समस्याओं को लेकर संघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र

जिले के अल्पसंख्यक विद्यालयों से जुड़ी लंबित समस्याओं को लेकर अल्पसंख्यक माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री को मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने जिले में अवस्थित 18 अल्पसंख्यक उच्च विद्यालयों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया और बताया कि इससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संघ ने विशेष रूप से नियुक्त शिक्षकों के सेवा अनुमोदन की मांग उठाई, जो लंबे समय से लंबित है। मांग पत्र में शिक्षकों की कमी, पठन-पाठन में आ रही बाधाओं और शिक्षकों की अनिश्चित स्थिति का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष शशि भूषण दुबे, सचिव नागेश्वर प्रसाद, उपाध्यक्ष पलविंदर सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत कौर गिल, राज्य कार्यकारिणी सदस्य रेशमा जबीन सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

संघ ने यह मांग भी रखी

  • अल्पसंख्यक उच्च विद्यालयों को भी प्लस टू में उत्क्रमित किया जाए
  • अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को भी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जाए
  • अल्पसंख्यक विद्यालयों के जिन शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं हुआ है उनकी बकाया राशि जारी की जाए

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