रांची : झारखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं के बीच राज्य सरकार ने बड़ा और ठोस कदम उठाया है। अब जमशेदपुर के डिमना क्षेत्र में हाथियों के लिए अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र कोल्हान क्षेत्र का पहला विशेष हाथी रेस्क्यू सेंटर होगा। इस पहल का उद्देश्य घायल, बीमार या भटके हुए हाथियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और मानव-हाथी टकराव की घटनाओं को कम करना है।
राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका समेत कई जिलों में हाल के महीनों में हाथियों के हमलों से लगभग 27 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसी घटनाओं ने प्रशासन को गंभीर कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।

कोल्हान क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ
वर्तमान में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे इलाकों में घायल हाथियों को इलाज के लिए दूर भेजना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी होती है। कई बार स्थिति गंभीर होने पर वन्यजीवों की मौत भी हो जाती है। नए रेस्क्यू सेंटर के निर्माण से मौके पर ही प्राथमिक उपचार, निगरानी और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह केंद्र मानव और हाथी दोनों के लिए राहत का काम करेगा। समय पर इलाज मिलने से हाथियों की मृत्यु दर में कमी आएगी और उनके आक्रामक व्यवहार में भी सुधार की संभावना है।
7 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगा अत्याधुनिक केंद्र
डिमना लेक के पास करीब 7 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस रेस्क्यू सेंटर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां ऑपरेशन थिएटर (ओटी), क्वारंटाइन जोन, किचन, फीडिंग सेंटर, सुरक्षित बाड़े और पर्याप्त जलस्रोत की व्यवस्था होगी। घायल या बीमार हाथियों को यहां लाकर उपचार, निगरानी और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
सरकार ने इस परियोजना के लिए जमीन आवंटित कर दी है और संभावना जताई जा रही है कि निर्माण कार्य अप्रैल से शुरू हो सकता है।
ग्रामीणों को मिलेगा प्रशिक्षण और संसाधन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि जिन क्षेत्रों में हाथियों से जन-धन की हानि हो रही है, वहां विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर ‘एलिफेंट रेस्क्यू टीम’ तैयार की जाए। ग्रामीणों को मशाल, टॉर्च, सोलर सायरन, डीजल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर मोड़ा जा सके।
इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी जाएगी। वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है। यह पहल झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेस्क्यू, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत होगी, तो दोनों पक्षों के बीच टकराव की घटनाएं स्वतः कम होंगी। राज्य सरकार की यह योजना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन कायम करने का प्रयास है।
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