Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने पेंशन बकाया राशि के भुगतान में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।
अदालत ने पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव और कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव और कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप के वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि अगली तिथि तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रधान सचिव का वेतन भी रोक दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है।
यह अवमानना याचिका रंजीत बिहारी प्रसाद द्वारा दायर की गई है। अदालत ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट किया था कि प्रार्थी को उनके अंतिम वेतन (ग्रेड पे 4200) के आधार पर पेंशन और अन्य लाभों का निर्धारण कर भुगतान किया जाए। इसके अलावा सोमनाथ ओझा को भी अंतिम वेतन 23 हजार रुपये के आधार पर पेंशन और छठे वेतन आयोग के अनुसार बकाया राशि देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने पाया कि निर्धारित आठ सप्ताह की समयसीमा के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। बाद में राज्य सरकार की ओर से समय मांगा गया, लेकिन फिर भी अनुपालन नहीं हुआ। यहां तक कि खंडपीठ में दाखिल अपील भी त्रुटिपूर्ण पाई गई और समय पर सुधार नहीं किया गया।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदेशों के अनुपालन में देरी और बाद में अपील दाखिल कर अवमानना से बचने की कोशिश न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। अदालत ने अपने आदेश की प्रति महालेखाकार, मुख्य सचिव, वित्त सचिव और संबंधित विभागों को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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