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JHARKHAND HEALH NEWS: राज्य में मात्र 700 आईसीयू बेड, स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाने के लिए तैयार किया रोडमैप

गाइडलाइंस फॉर आर्गनाइजेशन एंड डिलीवरी आफ इंटेंसिव केयर सर्विसेज विषय पर राज्य स्तरीय सम्मेलन में अपर मुख्य सचिव ने माना 18 जिलों में आईसीयू के बेड ही नहीं है अवेलेबल

by Vivek Sharma
आईसीयू केयर वर्कशॉप
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RANCHI: झारखंड में गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से होटल बीएनआर चाणक्या में सोमवार को गाइडलाइंस फॉर आर्गनाइजेशन एंड डिलीवरी आफ इंटेंसिव केयर सर्विसेज विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने राज्य की भविष्य की योजनाओं और आईसीयू प्रबंधन पर रोडमैप साझा किया।

हालांकि उन्होंने माना कि राज्य में आईसीयू बेड की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा कि राज्य में 28 हजार बेड हॉस्पिटलों में है। इसमें आधे बेड प्राइवेट हॉस्पिटलों के है। इसकी तुलना में आईसीयू बेड 15 परसेंट होना चाहिए। लेकिन हमारे पास मात्र 700 आईसीयू बेड है। ये आंकड़े चौंकाने वाले है। उन्होंने कहा कि 100 बेड पर 15 बेड आईसीयू के होने चाहिए पर हमारे पास ये व्यवस्था नहीं है। हम धीरे-धीरे ही सही इस पर काम करते हुए आगे बढ़ेंगे। अगले कुछ सालों में इसे 15 परसेंट तक ले जाएंगे।

60 हजार बेड करने की तैयारी

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ के आधार पर मजबूत किया जाएगा। इसके तहत रिम्स और सदर अस्पतालों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा और चार प्रमुख अस्पतालों को ‘टेली-आईसीयू’ के माध्यम से जोड़ा गया है। भविष्य में अन्य जिलों के प्राइवेट हॉस्पिटलों को भी इससे जोड़ने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि बेड की कमी को दूर करने के लिए अगले 3-4 सालों का रोडमैप तैयार किया गया है। जिसके तहत बेड की संख्या बढ़ाकर 60,000 करने की है। इसके अलावा उन्होंने ये भी माना कि 18 जिलों में आईसीयू बेड ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे कई मेडिकल कालेजों में आईसीयू बेड का नहीं होना भी चिंता का विषय है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि राज्य में 1000 की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन झारखंड में 7500 की आबादी पर एक डॉक्टर है। इसके लिए भी स्वास्थ्य विभाग काम कर रहा है। इसमें थोड़ा समय जरूर लगेगा पर हॉस्पिटल लोगों में व्यवस्था सुधरेगी।

आईसीयू मैनेजमेंट के लिए ट्रेनिंग सेंटर

आईसीयू बेड बढ़ाने के साथ ही मैनपावर की कमी दूर करने के लिए रिम्स के सहयोग से तकनीकी कर्मचारियों को वेंटिलेटर ऑपरेशन और आईसीयू केयर का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मशीन और उपकरणों की कमी नहीं होने दी जाएगी। फंड और संसाधन विभाग की ओर से समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटलों को भी आईसीयू प्रबंधन के लिए मजबूत बनाने हेतु राज्यस्तर पर ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि नामकुम में ही ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा। वहीं प्राइवेट हॉस्पिटलों के डॉक्टर व स्टाफ को भी सरकार ट्रेनिंग देगी। उन्होंने कहा कि बजट में ट्रेनिंग सेंटर खोलने का प्रावधान किया गया है। ट्रेनिंग सेंटर के लिए उन्होंने डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया।

टेली आईसीयू से जुड़े प्राइवेट हॉस्पिटल

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टेली आईसीयू की सुविधा हमलोगों ने शुरू की है। जिससे कई सरकारी हॉस्पिटलों और मेडिकल कॉलेजों को जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल को भी इस सिस्टम से जुड़ने को कहा। जिससे कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिल सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रेफर न करें। जिला अस्पतालों से मरीज रेफर करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि जहां भेजा जा रहा है, वहां बेड और सुविधाएं उपलब्ध हों। हब एंड स्पोक मॉडल से रिम्स और रांची सदर अस्पताल पर लोड कम किया जा सकेगा। जिसे बढ़ाने के लिए विभाग काम कर रहा है। कई चरणों में इसमें बढ़ोतरी का रोडमैप तैयार किया गया है। एसओपी को सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटलों में भी लागू किया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर सुविधा उनके पास के हॉस्पिटल में ही मिल जाएगी। सीएम ने भी हॉस्पिटलों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए फंड उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा है कि व्यवस्था सुधारने के लिए कोई सीमा नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक विद्यानन्द शर्मा पंकज ने बताया कि एसओपी के तहत राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू और सीसीयू सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी। निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स ट्रॉमा सेंटर के एचओडी डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य और अन्य विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया।

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