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Bokaro Coalfield Strike : मजदूरों की देशव्यापी हड़ताल का झारखंड में व्यापक असर, कोयलांचल में कोलियरियों में काम-काज ठप, करोड़ों के नुकसान की आशंका

by Mujtaba Haider Rizvi
Bokaro Coalfield Strike
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Bokaro: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए लेबर कोड के विरोध में गुरुवार को विभिन्न मजदूर संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल की है। इस हड़ताल की वजह से पूरे झारखंड में काम-काज ठप है। इससे कोयला कंपनियों समेत विभिन्न कंपनियों को करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका है। प्रदेश के सभी शहरों में मजदूरों ने धरना प्रदर्शन किया है।

बेरमो में कोयला उत्पादन प्रभावित

बोकारो जिला के बेरमो कोयलांचल में गुरुवार को सभी कोलियरियों में काम बंद हो गया है। कोयला उत्पादन बाधित है। कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम भी नहीं हो रहा है। मजदूरों की हड़ताल का संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने समर्थन किया है। इसके चलते इस हड़ताल का व्यापक असर हुआ है। मजदूर संगठनों के नेता और मजदूर बेरमो इलाके में पहुंचे। यहां मजदूर नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को हर हाल में झुकना होगा।

मजदूर यूनियन के नेताओं ने कहा कि सरकार जो नए लेबर कोड लागू लाई है। इससे मजदूरों के अधिकारों का हनन होगा। कोलियरियों में मजदूरों के साथ आए दिन हादसे होते हैं। मजदूरों की जान चली जाती है। इसके तहत प्रावधान है कि मजदूरों की जान जाने पर उनके आश्रित को तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया जाएगा।

नई लेबर कोड से आएगी औद्योगिक अशांति

लेकिन जो नए लेबर कोड हैं इसमें मजदूरों का यह अधिकार समाप्त हो जाएगा। ऐसा भी होता है कि अगर कोई कर्मचारी काम करने में अस्वस्थ है। अनफिट हो गया है। काम नहीं कर पा रहा है। तो उसकी जगह उसके आश्रित को नौकरी दी जानी है। लेकिन, नया लेबर कोड मजदूरों का यह हक समाप्त कर देगा। मजदूर नेताओं ने कहा कि इसी को लेकर कोल इंडिया की अनुषांगिक इकाई सीसीएल का डोरी एरिया, एरिया अकाउंट ऑफिस, एरिया सेल ऑफिस, ढोरी जीएम ऑफिस, महिला क्लब ढोरी, बोकारो और करगली एरिया के खास महल प्रोजेक्ट, गोविंदपुर प्रोजेक्ट आदि के कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

देशव्यापी हड़ताल को इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू आदि का भी समर्थन है। सीटू के केंद्रीय सचिव विजय भोई ने कहा कि नए कानून से राज्य में एक औद्योगिक अशांति बहाल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मजदूरों को आठ घंटे की जगह 12 घंटे ड्यूटी करनी होगी। मजदूरों की हड़ताल का अधिकार समाप्त हो जाएगा। यह सब मानवता विरोधी है।

हड़ताल में शामिल नहीं है बीएमएस यूनियन

नेताओं का कहना है कि सिर्फ एक यूनियन बीएमएस इस बंद में शामिल नहीं है। लेकिन उनका भी नैतिक समर्थन हमारे साथ है। बीएमएस सरकार की सहयोगी यूनियन है। इसीलिए यूनियन के नेता मजबूरीवश सीधे तौर पर हमारे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके। जनता मजदूर संघ के सचिव संतोष कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार से उनकी कोई नाराजगी नहीं है। बस यह नए लेबर कानून वापस होने चाहिए।

धनबाद में भी दिखा बंद का असर

कोयला नगरी धनबाद में भी बंद का असर देखने को मिला है। बीसीसीएल और ईसीएल की कई कोलियरी में उत्पादन और डिस्पैच प्रभावित हो गया है। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले कई कामगार यूनियन के मजदूर हड़ताल पर हैं। कई परियोजनाओं पर इसका असर देखने को मिल रहा है।

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