Ranchi (Jharkhand) : झारखंड के निजी स्कूलों के लिए शुक्रवार को हाईकोर्ट से एक बड़ी राहत की खबर आई है। झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन समेत राज्य के कई निजी स्कूल संगठनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वर्ष 2019 के नियमों के तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपना फैसला सुनाया है। निजी स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act 2009) के तहत बने इन नियमों को कोर्ट में चुनौती दी थी।
सालाना एफिलिएशन फीस पर हाईकोर्ट की रोक
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पैरवी की। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा एफिलिएशन के लिए आवेदन में निजी स्कूलों से प्रतिवर्ष कक्षा एक से पांच तक के लिए 12,500 रुपये और कक्षा एक से आठ तक के लिए 25,000 रुपये की फीस लेने के नियम को गलत ठहराते हुए इसे निरस्त कर दिया है। इससे राज्य के निजी स्कूलों को अब हर साल एफिलिएशन के लिए यह फीस नहीं देनी होगी।
जमीन संबंधी नियम बरकरार, छह माह की छूट
हालांकि, कोर्ट ने सरकार के उस नियम को सही बताया है, जिसमें ग्रामीण निजी स्कूलों के लिए 60 डिसमिल और शहरी निजी स्कूलों के लिए 40 डिसमिल जमीन की अनिवार्यता है। लेकिन, हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को इस नियम का पालन करने के लिए छह माह की मोहलत दी है। कोर्ट ने कहा है कि इन छह महीनों के भीतर स्कूलों को जमीन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
एफिलिएशन कमेटी का आकार छोटा करने का आदेश
इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की एफिलिएशन के लिए बनी स्थानीय विधायक, सांसद सहित अन्य सदस्यों वाली कमेटी को बड़ा बताते हुए इसके आकार को सीमित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अब इस कमेटी में केवल आठ सदस्य ही होंगे।
निजी स्कूलों ने दी थी नियमों को चुनौती
गौरतलब है कि निजी स्कूल संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2019 के नियमों को चुनौती दी थी। उनकी आपत्तियों में स्कूलों से प्रतिवर्ष एफिलिएशन फीस वसूलना, निजी स्कूलों के लिए जमीन का निर्धारण और एफिलिएशन कमेटी का गठन जैसे मुद्दे शामिल थे, जिस पर हाईकोर्ट ने आंशिक रूप से निजी स्कूलों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

