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JPSC Exam Cancellation: हाईकोर्ट में सरकार बोली-जब पूरी परीक्षा ही धांधली की भेंट चढ़ गई, तो सही-गलत का फर्क कैसे करें?’

परीक्षा कराने वाली एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल, राज्य सरकार ने दिया तर्क-एक गंदी मछली पूरे तालाब को करती है गंदा, हाईकोर्ट में पूर्व से जारी राहत बरकरार।

by Kanchan Kumar
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रांची : झारखंड में नियुक्तियों को लेकर जारी खींचतान अब अदालत में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार द्वारा जेपीएससी की परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के विरोध में दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत के सामने दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। मामले की अगली तारीख 12 सितंबर तय की गई है। तब तक प्रभावित अभ्यर्थियों को मिली पुरानी अंतरिम राहत जारी रहेगी।

​याचिकाकर्ताओं का तर्क- रद्द करने का फैसला न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ

​अदालत की कार्यवाही शुरू होते ही याचिकाकर्ताओं के वकील इंद्रजीत सिन्हा ने अपनी बात रखी। उन्होंने परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल की कार्यशैली और पूरी बहाली प्रक्रिया की साख पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों की नजीर देते हुए कहा कि सरकार द्वारा बिना सही जांच-पड़ताल के पूरी परीक्षा को अचानक रद्द कर देना प्राकृतिक न्याय के नियमों का उल्लंघन है। उनका कहना था कि जिन अभ्यर्थियों ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है, उनके भविष्य को इस तरह संकट में नहीं डाला जाना चाहिए।

गड़बड़ी इतनी बड़ी कि सही-गलत को छांटना नामुमकिन

​जवाब में राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अच्युत केशव ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने अदालत को बताया कि किन परिस्थितियों में आकर पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा। ​सरकार की तरफ से मशहूर कहावत का जिक्र करते हुए कहा गया कि “एक गंदी मछली पूरे तालाब को खराब कर देती है।” वकील ने तर्क दिया कि परीक्षा के दौरान गोपनीयता और नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ीं कि बड़े स्तर पर धांधली हुई। इस स्थिति में यह पहचान पाना बिल्कुल असंभव हो गया था कि कौन सा अभ्यर्थी बेकसूर है और किसने गड़बड़ी का फायदा उठाया है। इसलिए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना ही एकमात्र निष्पक्ष रास्ता बचा था।

​सिस्टम की नाकामियों पर हाईकोर्ट ने जताई गहरी चिंता

​दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के गिरते स्तर और आए दिन होने वाले विवादों पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी की कार्यप्रणाली में यह कोई नई बात नहीं है। आयोग जब भी कोई बहाली निकालता है, उसके किसी न किसी चरण में खामी निकल ही आती है। चाहे वह प्रारंभिक परीक्षा हो या फिर मुख्य परीक्षा ।
​गौरतलब है कि एक दिन पहले ही हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने से जुड़े एक अन्य मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है। जेपीएससी मामले में अब 12 अक्टूबर (सोमवार) को दोपहर 2:15 बजे फिर से बहस होगी।

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